लोजपा सांसद अरुण भारती ने चिराग पासवान को लेकर दिए अहम बयान।
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बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव तय हैं। इस बीच एनडीए से लेकर महागठबंधन में सीटों को लेकर खींचतान जारी है। न सिर्फ सीट, बल्कि मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर भी दोनों पक्षों में विचार का दौर जारी है। एनडीए में बाहर से तो नीतीश कुमार के नाम पर सहमति दिखती है, लेकिन विपक्षी नेता दावा करते हैं कि नीतीश को लेकर गठबंधन में सब ठीक नहीं है। उधर तेजस्वी को लेकर भी खुले तौर पर महागठबंधन के साथी दल कुछ भी कहने से बचते रहे हैं।
इस बीच एक चर्चा जोरों पर हो रही है, यह चर्चा है चिराग पासवान के नाम पर। दरअसल, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास पासवान) ने चिराग पासवान को मुख्यमंत्री बनाने के लिए बड़ा दावा ठोक दिया है। अमर उजाला से खास बातचीत में चिराग पासवान के जीजा और लोकसभा में लोजपा के मुख्य सचेतक अरुण भारती ने साफ कहा कि अगर उन्हें मौका मिला तो वे प्रधानमंत्री मोदी से चिराग पासवान को बिहार का मुख्यमंत्री चेहरा बनाने की मांग करेंगे।
आइये जानते हैं उनके इंटरव्यू की खास बातें...
सवाल: तेजस्वी का आरोप है कि एनडीए में दलितों को सिर्फ इस्तेमाल किया जाता है, उनको कभी मुख्यमंत्री के तौर पर पेश नहीं किया जाता?
देखिए जब तेजस्वी ऐसी बात कहते हैं तो मुझे उन पर थोड़ा सा तरस आता है क्योंकि उनको अपनी पार्टी के बारे में इस बात की जानकारी नहीं है। उनके यहां एक बहुत बड़े नेता हैं अब्दुल बारी सिद्दीकी। जब 17 महीने की सरकार में वो जाते हैं नीतीश जी के साथ तो उस समय वो खुद ही बनते हैं डिप्टी सीएम। क्यों नहीं वो अब्दुल बारी सिद्दीकी को बना देते हैं। या जब उनके उनकी उनकी माताजी और पिताजी सरकार में थे 15 साल और जब लालू जी किसी कारणों से गद्दी छोड़कर के कहीं ये जाने वाले थे तब उन्होंने क्यों नहीं अपनी पार्टी के सीनियर नेता को बना दिया। यह कार्य उन्होंने नहीं किया। जब वो उंगली उठाते हैं दूसरों पर तो उनको अपनी तरफ भी देखना चाहिए। वही यहां पर देखिए हमारे नेता जब जीत करके आए तो उन्होंने दलित प्रतिनिधित्व के माध्यम से उनको केंद्रीय मंत्री बनाया और एक बड़ी ही महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी दी है जिसको बखूबी वो निभा रहे हैं।
एक बात अवश्य है कि आजादी के 75 साल से ज्यादा हो चुके हैं। लगभग बिहार की मैं बात करूं तो हर समाज को प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है। मुझे लगता है कि समय सही समय जब आएगा तो हमारे समाज को भी यह मौका मिलेगा।
सवाल: राहुल-तेजस्वी दो युवा चेहरे महागठबंधन या इंडी ब्लाक से दिखाई पड़ते हैं, लेकिन एनडीए में नीतीश पर उम्र हावी दिख रही है तो आपकी तरफ और कोई चेहरा नहीं दिखता, ये नुकसान तो नहीं करेगा?
सवाल: तो आपके यहां सीएम मैटेरियल नीतीश के अलावा कौन?
अकेले गठबंधन की यही खूबी है कि आपको आपके अकेले मानने से कुछ नहीं होता है। राहुल गांधी जी अपने प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम जी को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। ठीक है, यह उनकी भावना हो सकती है। वहीं, आप यह देखिए नीतीश कुमार जी को सब लोग मान के चल रहे हैं। गठबंधन में मान के चल रहे हैं कि इनके नेतृत्व में हम लोग चुनाव में जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, हमारे नेता चिराग पासवान जी इनके नेतृत्व में हम चुनाव में जाएंगे। हमारे यहां नेताओं की कमी नहीं है। आप याद कीजिए माननीय प्रधानमंत्री जी से लेकर के नीतीश कुमार, हमारे नेता चिराग पासवान, जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा, सम्राट चौधरी भी हैं। तो हमारे यहां नेताओं की कमी नहीं है। सारे के सारे सीएम मैटेरियल हैं इसमें। मुझे लगता है कि जब मौका आएगा तो गठबंधन में जिसको भी ये जिम्मेदारी दी जाएगी वो इसे बखूबी संभालेंगे।
सवाल: दो दशक में ज्यादातर एनडीए के नेतृत्व में नीतीश राज रहा है, कहीं जनता ऊबकर तो नहीं बदलाव चाहेगी?
देखिए, जब भी बिहार की बात होती है हम तो सबसे पहले आप याद कीजिए जिस जंगल राज से बिहार को निकाल के नीतीश कुमार जी लाए थे और उसके बाद जो विकास की रफ्तार हम लोगों ने पकड़ी है वह आज भी कायम है। अब बदलाव आपको देखने को मिलता है धरातल पर। भले ही जंगल राज में उस वक्त आपने अपहरण को उद्योग बना दिया था। सड़कें नहीं थी। शिक्षा की वो व्यवस्था नहीं थी और शिक्षा व्यवस्था के नाम पे सिर्फ चरवाहा विद्यालय थे। कॉलेजों की स्थापना नहीं होती थी। अब ये सभी कुछ हो रहा है। रोड बन रहे हैं। अब धीरे-धीरे बिहार में भी एक्सप्रेसवे आने वाले हैं। अह इंडस्ट्रियल कॉरिडोर्स बन रहे हैं। नए-नए उद्योग खुल रहे हैं। अभी तुरंत ही नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी आई है, जिसके तहत अलग-अलग जिलों में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर्स बन रहे हैं।
तो यहां भी वह सारी चीजें हो रही है। ये बहुत पहले हो जानी चाहिए थी, लेकिन जब 15 साल का जंगल आपको पीछे खींचता है तो आपको आगे बढ़ने में बहुत समय लगता है। वहां से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने बहुत खूबसूरती से निकाला है और मुझे लगता है कि अब हम एक बड़ी छलांग के लिए तैयार हैं।
सवाल: जाति कितना मायने रखेगी बिहार के चुनाव में?
सवाल: प्रशांत किशोर कह रहे हैं कि जाति नहीं, बल्कि शिक्षा और विकास पर वोट दें, इसका असर होगा?
मैं प्रशांत किशोर जी के बारे में टिप्पणी नहीं करूंगा, लेकिन यह मैं जरूर कहूंगा कि आज के दिन में, क्योंकि बिहार का समाज थोड़ा सा मुझे लगता है कि हम लोग को और भारत के मुख्यधारा में आकर के आगे बढ़ने की जरूरत है। आज के दिन में जो अलग-अलग जातियां और समाज बिहार में है हम वो एक कटु सत्य है। यह धीरे-धीरे यह भी खत्म हो जाएगा। जैसे-जैसे विकास की बानगी बढ़ेगी और मुझे लगता है कि यह भी खत्म हो जाएगा। लेकिन आज के दिन ये कटु सत्य है और इसे हमें ध्यान में अवश्य रखना चाहिए।
सवाल: लोजपा (रामविलास) भाजपा की जूनियर पार्टनर ही रहती है। भाजपा के साथ आपको जो तवज्जो मिलती है, उससे संतुष्ट हैं ?
देखिए महाभारत में भी पांच भाई थे और पांचों भाई के अलग-अलग रोल थे। जो हम लोगों का रोल है गठबंधन में हम कहीं से भी किसी भी तरह से कम नहीं लगता है। मुझे लगता है कि जब अर्जुन को जरूरत थी तो वह वनवास में भी शांति से रहे। जब जरूरत पड़ा तो बृहला भी बने। गठबंधन में हमें जो भी रोल दिया जाएगा, उसके लिए हम तैयार हैं और बखूबी उसे निभाएंगे।
सवाल: थोड़ा खुलकर बताएं, लोजपा क्या चाहती है?
जब 2020 में हम लोग अलग चुनाव चुनाव लड़े थे तो वो इसलिए लड़े थे, क्योंकि गठबंधन में जो हमारे कार्यकर्ता हैं उन सबकी उम्मीदें होती हैं। सबकी आकांक्षाएं होती हैं। वह भी चाहते हैं कि जनप्रतिनिधि बन के जनता की सेवा करें, पार्टी की सेवा करें, बिहार की सेवा करें और 2020 में परिस्थितियां ऐसी बन गई थीं, जब हमारे सारे कार्यकर्ताओं को जगह देनी थी। सबको चुनाव लड़वाना था। चूंकि गठबंधन में सीमाएं हैं, अपनी मर्यादाएं हैं। हम गठबंधन नहीं कर पाए, इसलिए हमने अलग हटकर के चुनाव लड़ा।
सवाल: सीटें एनडीए में कम मिलीं तो भी चिराग पासवान क्या हनुमान बने रहेंगे या दूसरे पाले में भी लोजपा दिख सकती है?
आप याद कीजिए उस वक्त भी हम किसी और गठबंधन में नहीं गए थे। हम अकेले लड़े, हमारे कार्यकर्ता चुनाव लड़े। हमें 6% का उस वक्त हम लोग को वोट शेयर मिला था। अगर हम लोग पूरे 243 सीटों पर लड़ते, उस समय हम सिर्फ 137 सीटों पर लड़े थे। अगर हम लोग 243 सीटों पर लड़ते तो हमें हमारा वोट शेयर 10% से ज्यादा होता। लेकिन हम किसी गठबंधन में नहीं गए और वापस जब आए तो अपने मूल गठबंधन में ही आए हैं। इसीलिए मुझे नहीं लगता कि हमारी अहमियत गठबंधन के दल होने पर किसी तरह से कम है और हमें कम मान सम्मान मिलता है। ऐसी कोई बात अगर कभी होती भी है तो यह बातें गठबंधन के अंदर रखते हैं और इसका हमें ड्यू हमेशा मिलता है।
सवाल: नीतीश कुमार और जीतनराम मांझी के बयान चिराग के बारे में आते हैं। मांझी ने उनको बच्चा बता दिया, आप भी बोलते हैं कैसी दोस्ती और सम्मान है ये, गठबंधन में सब ठीक तो है?
ये तो मैं मानूंगा कि जीतन राम मांझी जी का जो अनुभव है, वो हमारे नेता और हम लोगों को हम लोग के लिए प्रासंगिक है। हमें उनका अनुसरण करने की जरूरत है। साथ ही साथ यह भी है कि पूरे गठबंधन में हमारी जो भी बातें होती हैं वो सुनी जाती हैं। मुझे नहीं लगता कि इन सारे प्रकरण में कहीं भी हमारे नेता ने, जो कि कैबिनेट में भी हैं, पॉलिसी मेकिंग में भी उनका रोल रहता है, जहां भी उन्होंने अपनी बातों को रखा है, प्रधानमंत्री जी ने बड़ी ही सीरियसली उनसे उनकी बातों को लिया है। इसीलिए चाहे वो वर्ल्ड फूड इंडिया, उनके मंत्रालय के माध्यम से कार्यक्रम हो या फिर जब वह विदेशों में जाकर के भारत का पक्ष रखते हैं, हमारे प्रधानमंत्री जी का पक्ष रखते हैं तो इन बातों को गंभीरता से भी लिया जाता है। मुझे नहीं लगता है कि कहीं से भी गठबंधन में किसी तरह से इस तरह का कोई दूरियां हैं।
हां, बीच-बीच में बातें होती है। मुझे लगता है कि गठबंधन में यह हमें आजादी है कि अगर नीति पर अगर किसी पॉलिसी पर कहीं मतभेद हो तो आपको अपनी बात जरूर रखनी चाहिए। मुझे लगता है कि एक गठबंधन के जिम्मेदार सहयोगी होने के तौर पर जब बिहार में कानून-व्यवस्था थोड़ी बिगड़ी थी और हमारे नेता ने अपनी बातों को रखा था तो यह एक जिम्मेदार गठबंधन के सहयोगी होने की निशानी थी कि उन्होंने अपनी बात को वहां तक पहुंचाया था और इस पर कारवाई भी हुई। इससे कानून व्यवस्था बेहतर हुई।
आप याद कीजिए कि यह समाज ही आपको नेता बनाता है। आपको नेतृत्व देता है। अगर वह समाज किसी कारण से पीड़ा में है तो नेता का दायित्व है कि आप अपने गठबंधन के सहयोगी तक इस बात को अवश्य ले जाएं। इस पर कारवाई करवा कर समाज को वो राहत दें। यही काम हमारे नेता ने किया है।
सवाल: दलित चेहरा मुख्यमंत्री बने, इसको लेकर लोजपा चिराग पासवान का नाम आगे बढ़ाते हुए खुलकर बैटिंग करेगी?
मुझे लगता है कि यह वक्त की मांग है। जनता की भी मांग है। जनता भी चाहती है। अलग-अलग सर्वे में भी आता है। इस बात को मुझे लगता है कि नेता खुद तो नहीं कहेंगे। इसलिए हम लोगों की भावना है। हम लोग हमेशा कहते हैं और साथ ही साथ इस बात को जिम्मेदारी से कहते हैं और यह जानते हुए भी कि हम जिस गठबंधन में हैं, उस मर्यादाओं का पालन भी हमें करना है और जब सही समय आएगा तो मुझे लगता है कि गठबंधन के हर सहयोगी इस बात को सुनेंगे और सही फैसला करेंगे।
हम लोग चाह रहे हैं कि एनडीए की सरकार बने बिहार में हम जहां पर 225 से ज्यादा सीटें हम जीत करके आए। महागठबंधन की जो असली जगह है लगभग 20 सीटों के नीचे उनको रहना चाहिए और गठबंधन के जो बड़े नेता तय करेंगे मुख्यमंत्री का चेहरा वो मुख्यमंत्री बनना चाहिए।
सवाल: चिराग पासवान को मुख्यमंत्री बनाने की मांग आप मोदी से रखेंगे?
मेरी पहुंच प्रधानमंत्री जी तक फिलहाल नहीं है। लेकिन जब भी मेरी पहुंच होगी तो मैं अपनी व्यक्तिगत भावनाओं से प्रधानमंत्री जी को अवगत कराऊंगा। मैं पार्टी कार्यकर्ता होने के तौर पर अपनी व्यक्तिगत भावनाओं को अपने गठबंधन के किसी भी नेता को बता सकता हूं। यही बात अगर मुझे मौका मिलेगा तो मैं प्रधानमंत्री जी को भी जरूर बताऊंगा। मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री जी को भी इस बात की कुछ न कुछ जानकारी होगी कि बिहार में परिस्थिति क्या है? क्योंकि हम लोगों से ज्यादा जानकारी के स्रोत उनके पास हैं। व्यक्तिगत तौर पर एक कार्यकर्ता होने के तौर पर अपनी भावनाओं से अगर मैं प्रधानमंत्री जी को अवगत कराता हूं तो मुझे पूर्ण विश्वास है कि मेरी बात को वह अवश्य सुनेंगे।
नीतीश कुमार को सीएम पद से रिटायर करने की मांग तेजस्वी कर रहे हैं, आप लोग क्या सोचते हैं..नीतीश फिट हैं?
सवाल: नीतीश चेहरा घोषित हैं, उसके बाद भी आप क्या चिराग को सीएम बनाने की मांग रखेंगे?
फैसला अंतोगत्वा गठबंधन में जो बड़े नेता हैं वही बैठकर के लेंगे। मेरे चाहने से या न चाहने से, मेरी भावनाओं से कोई बहुत फर्क पर नहीं पड़ता है। जो भी गठबंधन के नेता निर्णय लेंगे वो हम लोग को जरूर मंजूर होगा।
सवाल: नवसंकल्प यही है क्या चिराग ही बिहार के नए सीएम के चेहरे हों?
एनडीए गठबंधन चाहता है कि एक एक प्रक्रिया के तहत ये चीजें हो और सभी लोग मान के चल रहे हैं कि एनडीए गठबंधन की तरफ से अगर कोई मुख्यमंत्री का चेहरा होगा तो नीतीश कुमार होंगे। गठबंधन के जो बड़े नेता तय करेंगे वह हम सभी मानेंगे, क्योंकि देखिए कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत यह होता है। बड़े नेता फैसला करते हैं। हम लोग की अपनी भावनाएं होती हैं। लेकिन हमारी भावनाएं भी गठबंधन की मर्यादा से बंधी हुई हैं। चिराग पासवान नव संकल्प के तौर पर पार्टी के चेहरे तो हैं ही। गठबंधन के भी चेहरे हैं और आने वाले समय में अगर भविष्य में बिहार के चेहरे बनते हैं तो हम लोग ज्यादा खुशी किसी को नहीं होगी।