फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bihar: भाजपा महासचिव विनोद तावड़े के साथ उपेंद्र कुशवाहा से मिले पवन सिंह, विधानसभा चुनाव को लेकर लगीं अटकलें

Tue, 30 Sep 2025 11:45 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बीते साल भाजपा ने पवन सिंह को निष्कासित कर दिया था। अब बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख से मुलाकात के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।
विज्ञापन
उपेंद्र कुशवाहा, पवन सिंह, विनोद तावड़े। - फोटो : ANI/PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार पवन सिंह ने मंगलवार को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े से मुलाकात की। सांसद उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर हुई इस बैठक की कई तस्वीरें वायरल हो रही हैं। तावड़े ने बैठक के बाद कहा कि पवन जी भाजपा में ही हैं। आदरणीय उपेंद्र कुशवाहा जी ने उन्हें शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिया है। आने वाले दिनों में पवन जी सक्रियता से एनडीए के लिए काम करेंगे, भाजपा के कार्यकर्ता के तौर पर।
विज्ञापन

 

गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही भाजपा नेता आरके सिंह ने कहा था कि पवन सिंह को पहले भाजपा से टिकट दिया गया था, फिर चुनाव लड़ने से मना कर दिया गया और कहीं और से भी टिकट नहीं मिला। यह सुनकर थोड़ा दर्द हुआ। इसलिए मेरा मानना है कि पवन सिंह को फिर से भाजपा में शामिल हो जाना चाहिए। आरके सिंह के इस बयान के बाद से यह अटकलें थीं कि पवन सिंह भाजपा से पूरी तरह से नाता तोड़ चुके हैं। हालांकि, अब तावड़े के बयान ने एक बार फिर पवन सिंह को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया।
 
पवन सिंह की कैसे हो गईं भाजपा से दूरियां?
बीते साल हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पवन सिंह को आसनसोल सीट से उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, पवन सिंह ने अगले ही दिन इस सीट से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस ने शत्रुघ्न सिन्हा क उम्मीदवार बनाया था। पवन सिंह के नाम वापस लेने के बाद उनकी भाजपा से दूरियां बनना शुरू हो गई थीं। हालांकि, इसमें अगला पड़ाव तब आया, जब भोजपुरी स्टार ने काराकाट सीट से निर्दलीय ही ताल ठोंकने का एलान कर दिया। इस सीट पर एनडीए पहले ही उपेंद्र कुशवाहा का नाम तय कर चुकी थी। इसके बाद भाजपा ने पवन सिंह को निष्कासित कर दिया था।
विज्ञापन




हालांकि, पवन सिंह के काराकाट से लड़ने का असर यह रहा कि वोट बंटने से लोकसभा चुनाव में कुशवाहा की हार हुई। इसके बाद एनडीए में दरार की स्थिति पैदा हो गई थी। बताया जाता है कि कुशवाहा समाज में भी भाजपा को लेकर नाराजगी थी। ऐसे में भाजपा विधानसभा चुनाव से पहले इस नाराजगी को खत्म करने की तैयारी कर रही थी।
विज्ञापन

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें