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देश की कई बड़ी कंपनियां कर रही तिहाड़ के कैदियों की रिहाई का इंतजार 

Wed, 04 Jul 2018 07:43 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज, डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
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कबड्डी में दम-खम दिखाते तिहाड़ जेल के कैदी
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देश की कई बड़ी कंपनियों को तिहाड़ जेल में बंद करीब सात सौ युवा कैदियों की रिहाई का इंतजार है। ये कैदी विभिन्न विद्याओं में इतने पारगंत हैं कि कंपनियों ने इन्हें रिहाई के बाद अपने यहां पर नौकरी देने की गारंटी दी है। इसके अलावा कुछ कैदी ऐसे भी हैं जो जेल से रिहाई होने के बाद खुद का छोटा मोटा व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। यह सब तिहाड़ प्रशासन और गैर सरकारी संगठनों की बदौलत संभव हो सका है। 

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तिहाड़ जेल में करीब एक हजार कैदी ऐसे हैं, जिनकी उम्र 18 से 21 के बीच है। इनमें से दो सौ कैदी हत्या के मामलों में, दो सौ लूटपाट-डकैती और बाकी छीनाझपटी जैसे केसों में बंद हैं। करीब डेढ़ सौ कैदी बलात्कार के मामले में तिहाड़ पहुंचे हैं। इस आयु समूह के अधिकांश कैदियों को जेल नंबर पांच में रखा गया है। 

इस जेल को गुरुकुल का नाम दिया गया है। तिहाड़ प्रशासन का मकसद होता है कि यहां पर आने वाले हर कैदी को इस लायक बना दिया जाए कि उसे जेल से छूटने के बाद दोबारा से समाज की मुख्यधारा में शामिल होने और खुद को आर्थिक तौर पर स्थापित करने में कोई दिक्कत न हो। कैदियों को नशे आदि की लत से बचाने के लिए उनकी नियमित काउंसलिंग की जाती है। 

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इस तरह खुद के पांव पर खड़े हुए युवा कैदी 

आईटीडीसी कोर्स 

इंडियन टूरिज्म डेवलपमेंट कार्पोरेशन द्वारा यह कोर्स शुरू किया है। 45 दिन के इस कोर्स में तीन तरह की विद्याएं शामिल हैं। अभी तक सौ से ज्यादा कैदी यह ट्रेनिंग ले चुके हैं। 

-फ्रंट ऑफिस कोर्स, 

इसमें 12वीं पास युवाओं को शामिल किया गया है। जेल से छूटने के बाद इन्हें विभिन्न होटलों में 20-25 हजार रुपये प्रति माह वेतन मिल जाएगा। अशोका गु्रप ऑफ होटल व दूसरे ऐसे संस्थानों ने इन्हें रिहाई के बाद अपने यहां पर नौकरी देने की बात कही है। 

फूड एंड बेवरेजेज 

इसमें आठवीं से दसवीं पास वाले कैदियों  को लिया जाता है। इसमें भी सौ से अधिक कैदी ट्रेंड हो चुके हैं। इन्हें प्रतिमाह बीस हजार रुपये मिल सकते हैं। 

हाउस कीपिंग

इस कोर्स में नब्बे से ज्यादा कैदी हैं। इनकी योग्यता पांचवीं पास रखी गई है। होटलों में इन्हें भी कम से कम पंद्रह हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलेगा। 

जेम्स एंड ज्वेलरी स्किल 

पश्चिमी यूरोप, अमेरिका और रूस आदि देशों में मणियों से बनने वाली माला, कंठी और ब्रेसलेट आदि का खूब प्रचलन है। 15 दिन का यह कोर्स जेम्स एंड ज्वेलरी स्किल काउंसिल आफ इंडिया के सहयोग से शुरू किया गया है। अभी तक साठ से ज्यादा कैदी यह कोर्स कर चुके हैं। 

इस कोर्स की मदद से तीस से पचास हजार रुपये प्रतिमाह आय हो सकती है। काउंसिल के निदेशक डीडी करेल का कहना है कि यह ज्वेलरी बनाने वालों को वे विभिन्न जगहों पर नौकरी दिलाएंगे। अगर कोई खुद का कारोबार करना चाहता है तो उसमें भी मदद की जाएगी। 

गोला शूज

इसका उपरी हिस्सा बनाना सिखाया जाता है। चालीस दिन की ट्रेनिंग के बाद यहां पर सौ से ज्यादा कैदी जूते बनाना सीख गए हैं। डीम इंडिया व दूसरी कई कंपनियों ने तिहाड़ जेल प्रशासन को भरोसा दिलाया है कि वे इन युवाओं की रिहाई के बाद इन्हें नौकरी पर रख लेंगे। इसके अलावा सौ से ज्यादा कैदी खादी ग्रामोध्योग से भी ट्रेनिंग ले रहे हैं। इससे वे खुद का काम धंधा शुरू कर सकेंगे और इससे उन्हें प्रतिमाह पच्चीस हजार की आमदनी होगी। 

एशियन पेंट कंपनी का कोर्स 

इसमें 18 दिन का कोर्स होता है। कैदियों को वॉल पेंटिंग सिखाई जाती है। पिछले दिनों नेरोलेक कंपनी ने एक कैदी की रिहाई के बाद उसे नौकरी दी थी। इसमें 30-35
हजार रुपये प्रतिमाह की कमाई हो सकती है। मेगामेट्रिक्स कंपनी ने हाथ से वस्त्रों पर डिजाइन बनाने वाले कैदियों को नौकरी का भरोसा दिया है। करीब 130 कैदी यह कोर्स कर चुके हैं। 


सोसायटी फॉर प्रमोशन ऑफ़ यूथ एंड मासेस (एसपीवाईएम) के निदेशक डॉक्टर राजेश का कहना है कि जेल से बाहर निकलने के बाद समाज का दायित्व है कि वह इनका साथ दे। विभिन्न सामाजिक संगठन और उद्योगपति इसमें अपना योगदान दे सकते हैं। 

हालांकि जेल में बंद नब्बे फीसदी से अधिक युवा कैदी पूरी तरह सुधर जाते हैं, लेकिन फिर भी हम उन्हें जेल से रिहा होने के बाद अपने हाफ वे होम में रखते हैं। इनकी हर गतिविधि पर बारीकी से नजऱ रहती है। किसी को काउन्सलिंग की ज़रूरत होती है, तो उसे मुहैया कराई जाती है। कम्पनी से बात कर उन्हें नौकरी दिला दी जाती है।

तिहाड़ की जेल नंबर पांच की अधीक्षक अंजू मंगला का कहना है कि रिहाई के बाद भी ये युवा जेल में फ़ोन कर सकते हैं। अगर जॉब लेने में उन्हें कोई दिक़्क़त होती है तो जेल प्रशासन उनकी मदद करता है। 

डीजी जेल, अजय कश्यप का कहना है, बहुत से युवा प्रोफ़ेशनल अपराधी नहीं होते। गलत संगत के चलते वे अपराध की राह पर निकल जाते हैं।ऐसे में उन्हें सुधार कर मुख्यधारा में वापस लाया जाता है, ताकि जेल में से निकल कर ये अपना और परिवार का भरण पोषण कर सकें।


आनंद, चोरी के मामले में बंद

उसे तिहाड़ में सब जानते हैं, वो इसलिए कि वह पेंटिंग बहुत अच्छी बनाता है।बाबा रामदेव और दिल्ली हाईकोर्ट  की एक महिला जज की भी तस्वीर बना चुका है। इसके अलावा उसने झकझोर कर रख देने वाले विभिन्न विषयों को लेकर भी पेंटिंग बनाई है। आनंद का कहना है कि उससे चार पाँच हज़ार रुपए कमा लेता है। ये पैसे अपने पापा को भेजता है। वह बाहर जाकर इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाएगा।


जो किसी विषय में रुचि नहीं रखते, उनके लिए खेलना ज़रूरी है।ऐसे क़ैदियों को कबड्डी, खो खो, टेबल टेनिस, बास्केटबाल और वालीवाल में डाला जाता है। यदि कोई खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करता है तो उसे आगे खेलने के लिए भेजा जा सकता है।हालाँकि इसके लिए अदालत से मंज़ूरी लेनी होती है। 
अंजू मंगला, जेल अधीक्षक 

एनसीसी ट्रेनिंग, डांस, संगीत और पेंटिंग भी सिखाई जाती है

अनुशासन बना रहे, इसलिए करीब सौ कैदियों को यह ट्रेनिंग दी गई है। इसकी मदद से कैदियों में आपसी सहयोग की भावना का विकास होता है। डांस की क्लास में अभी चालीस युवा हैं, जबकि संगीत में बीस और पेंटिंग में भी इतने ही युवाओं का दाखिला हुआ है। बता दें कि पेंटिंग में हर जेल के कैदियों में रूचि देखी गई है।
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