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पुरानी पेंशन पर बड़ा अपडेट: ओपीएस देने वाले पांच राज्यों को नहीं मिलेंगे सवा लाख करोड़, वित्तीय संकट की आहट

सार

सरकार ने एक बार फिर से दोहराया है कि कर्मचारियों को पुरानी पेंशन नहीं मिलेगी। इतना ही नहीं, जिन पांच राज्यों ने ओपीएस को लागू किया है, उन्हें पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के पास जमा लगभग सवा लाख करोड़ रुपये नहीं मिलेंगे।
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पेंशन - फोटो : एडोव
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केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन पर बड़ा अपडेट आया है। सरकार ने एक बार फिर से दोहराया है कि कर्मचारियों को पुरानी पेंशन नहीं मिलेगी। इतना ही नहीं, जिन पांच राज्यों ने ओपीएस को लागू किया है, उन्हें पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के पास जमा लगभग सवा लाख करोड़ रुपये नहीं मिलेंगे। संभव है कि इससे पांचों राज्यों के सामने वित्तीय संकट खड़ा हो सकता है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में बताया है कि 'पुरानी पेंशन' लागू नहीं होगी। इसके अलावा संबंधित राज्यों को पीएफआरडीए में जमा फंड भी ट्रांसफर नहीं होगा। 'महाराष्ट्र राज्य जुनी पेन्शन संघटना' के राज्य सोशल मीडिया प्रमुख विनायक चौथे का कहना है कि ओपीएस के संदर्भ में वित्त राज्य मंत्री का उत्तर न केवल निराशाजनक और दुर्भाग्यपूर्ण हैं, बल्की यह भ्रमित करने वाला भी है।   

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विनायक चौथे के मुताबिक, ओपीएस बहाल करने वाले पांच राज्यों के एनपीएस के सवा लाख करोड़ रुपये लौटाने से केंद्र सरकार का इनकार करना, ये कर्मियों के हितों पर कुठाराघात करने जैसा है। सरकार का कहना है कि इस रकम को वापस करने का कोई नियम नहीं है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री द्वारा दिया गया उत्तर इसलिए भ्रमित कर रहा है, क्योंकि अब तक एपीएस से ओपीएस में परिवर्तित हुए देश के लगभग 33,000 से ज्यादा कर्मचारियों का एनपीएस का पैसा, पीएफआरडीए द्वारा वापस किया जा चुका है। यह जानकारी दो वर्ष पहले खुद पीएफआरडीए द्वारा दी गई थी। 
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अकेले महाराष्ट्र में विज्ञापन कट ऑफ डेट के आधार पर लगभग सात हजार राज्य कर्मचारी शिक्षकों को एनपीएस से ओपीएस का का लाभ मिला है। उनके एनपीएस खाते में जमा राशि, ऑनलाइन एग्जिट विड्रॉल सिस्टम द्वारा राज्य सरकार को मिली। इसमें से कर्मचारी अंशदान, उनके जीपीएफ खातों में ट्रान्सफर किया गया। 

बतौर विनायक, देश भर में हर राज्य में ऐसे कर्मचारी हैं, जिन्हे न्यायालय के माध्यम से विज्ञप्ति तारीख के आधार पर ओपीएस मिली है। इनकी संख्या देशभर में लगभग 50,000 है। उनके एनपीएस की राशि, जीपीएफ खातों में जा चुकी है। सरकार का अंशदान, सरकार के खातों में जा चुका है। ऐसे में यह कहना कि एनपीएस की कर्मचारी राशि, राज्य सरकार को लौटाने संबंधी कोई नियम नहीं है, ऐसा उत्तर सरासर गलत है। क्या ऐसे जवाब देकर केंद्र सरकार ओपीएस बहाल करने वाले बाकी अन्य राज्यों को रोकना चाहती है। न करेंगे, न करने देंगे, यह सोच बिल्कुल गलत है।  

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संसद के मानसून सत्र में लोकसभा सदस्य अमरा राम ने पूछा था कि क्या सरकार का पुरानी पेंशन लागू करने का इरादा है। क्या सरकार का विचार, नई पेंशन योजना की राशि, उन राज्यों को वापस करने का है, जिन्होंने पुरानी पेंशन योजना लागू की है। कितने राज्यों ने पुरानी पेंशन लागू की है और इन राज्यों द्वारा सरकार के पास कितनी पेंशन निधि जमा की गई है। यह राशि कब तक राज्यों को वापस करने की संभावना है। 

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने अपने जवाब में कहा, केंद्र सरकार के कर्मियों के संबंध में पुरानी पेंशन 'ओपीएस' बहाल करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। पीएफआरडीए विनियम, 2015 के साथ पठित पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण 'पीएफआरडीए' अधिनियम 2013 व अन्य प्रासंगिक विनियमों के अंतर्गत ऐसा कोई उपबंध नहीं है, जिनके अंतर्गत राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के लिए अभिदाताओं की संचित राशि को राज्य सरकार को वापस किया जा सके। 

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