दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) में फर्जी केस खड़े कर इनके जरिए कुछ वकीलों को भारी भरकम फीस चुकाने के माध्यम से बड़ा भ्रष्टाचार करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि इस तरह से कुछ वकीलों को बेजा तरीके से लाभ पहुंचाया जा रहा है। आरोप है कि इस माध्यम से अब तक एक करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। डीडीसीए के सात सदस्यों ने शुक्रवार को इसके विरोध में संस्थान के लोकपाल बीडी अहमद के सामने यह मुद्दा उठाया है और मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
लोकपाल के समक्ष पेश मामले में दावा किया गया है कि कुछ लोगों के इशारे पर डीडीसीए के कुछ मामलों में गैरजरूरी केस दाखिल किया जाता है। फिर इनकी सुनवाई के नाम पर कुछ वकीलों को भारी भरकम भुगतान किया जाता है। इन वकीलों की यह फीस उनकी सामान्य केसों में ली जा रही फीसों से कई-कई गुना ज्यादा बताई गई है। आरोप है कि सुनवाई के दौरान भी केसों को निपटाने की बजाय टालमटोल वाला रवैया अपनाया जा रहा है, जिससे केसों में उपस्थित होने के नाम पर फर्जी बिल बनाया जा सके।
डीडीसीए के सदस्यों प्रमोद जैन, अशोक शर्मा, राजीव सेठ, गौरव जैन, सुनील बाली, राजिंदर सिंह और देवेंदर सेठी ने लोकपाल की अदालत में इस मामले को उठाया है और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
डीडीसीए में इसके पहले भी प्रबंधन में भारी अनियमितता किए जाने का मामला सामने आया था। मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने डीडीसीए का प्रबंधन रिटायर्ड न्यायाधीशों के माध्यम से किए जाने का आदेश जारी कर दिया था। इस प्रकार तीन वर्षों तक डीडीसीए का प्रबंधन न्यायाधीशों के माध्यम से किया गया था।
प्रबंधन का चुनाव जल्द
डीडीसीए के प्रबंधन का चुनाव जल्दी ही होने जा रहा है, जिसके बाद नई टीम अपनी जिम्मेदारी संभालेगी। इसके पूर्व मीडिया जगत की एक बड़ी हस्ती रजत शर्मा डीडीसीए के अध्यक्ष चुने गए थे। लेकिन डीडीसीए में चल रही कथित अनियमितताओं से निराश होने के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद अब डीडीसीए के प्रबंध समिति के चुनाव कराए जा रहे हैं।