भोपाल की सेंट्रल जेल से सिमी के आठ आतंकियों के फरार होने के बाद राज्य की जेलों की सुरक्षा को लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं बड़ा सवाल तो खुद भोपाल जेल की उस हाइक्योरिटी को लेकर ही है जिसे आईएसओ प्रमाणपत्र तक मिलने का दावा किया जा रहा है।
हालांकि भोपाल की इस सेंट्रल जेल की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के दावों की पोल खुद राज्य के पूर्व जेल प्रमुख ने ही खोल दी है। जिन्होंने दो साल पहले ही भोपाल जेल समेत राज्य की कई बड़ी जेलों की सुरक्षा व्यवस्था रामभरोसे होने की चेतावनी दे दी थी।
राज्य सरकार को लिखे खत में उन्होंने इस बात की जानकारी दे दी थी कि राज्य की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था का बड़ा अभाव है और पर्याप्त स्टाफ की भी भारी कमी है। बावजूद इसके सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंगी और भोपाल जेल ब्रेक जैसी बड़ी घटना हो गई।
राज्य के पूर्व आईजी जेल जीके अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने 26 जून 2014 को राज्य के मुख्य सचिव एंथनी डेसा को लिखे खत में जेलों की सुरक्षा व्यवस्था में जारी खामियों की ओर ध्यान दिलाया था। खत की एक कॉपी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और आईबी को भी भेजी गई थी।
पूर्व आईजी जेल ने सरकार को खत लिखकर दी थी चेतावनी
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अग्रवाल निराशा से कहते हैं कि उनकी चेतावनियों और सुझावों का कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने यह खत खंडवा की जेल ब्रेक से सिमी के छह आतंकियों के भागने की घटना के बाद लिखा था।
अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में अधिकारियों की एक बैठक बुलाने की मांग की थी, जिसमें तमाम अधिकारियों से भोपाल समेत तमाम बड़ी जेलों की सुरक्षा के संबंध में सुझाव मांग कर उनकी चर्चा की जा सकती थी।
मुख्य सचिव को लिखे 'प्रदेश की जेलों से सिमी संगठन एंव अन्य खतरनाक बंदियों की फरारी पर रोक लगाने विषयक सुझाव' शीर्षक वाले खत में उन्होंने तमाम मुद्दों का जिक्र किया था। जिसमें उन्होंने भोपाल जेल की सुरक्षा, जेल की बिल्डिंग, अपर्याप्त सुरक्षा इंतजाम और कर्मचारियों की दुखद स्थिति की ओर भी ध्यान दिलाया था।
स्टाफ की कमी और संसाधनों के अभाव से जूझ रहा है जेल विभाग
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अग्रवाल ने साफ कहा था कि जेलों की सुरक्षा भगवान भरोसे हैं और पता नहीं यह कब तक जारी रहेगी। हालांकि तमाम सरकारी खानापूर्ति की तरह ही अग्रवाल की यह चिट्ठी भी फाइलों के ढेर में पहुंचकर दब गई। उन्होंने बताया कि यह खत जेल प्रशासन की ओर से तभी जारी कर दिया गया था। वहीं डीजी जेल संजय चौधरी ने बताया कि उन्हें ऐसे खत की कोई जानकारी ही नहीं है।
वहीं अग्रवाल कहते हैं जेल आईजी के पद से रिटायर होने के बाद मैंने अपनी नैतिक जिम्मेदारी मानते हुए सरकार को इस संबंध में सुझाव दिए थे लेकिन अफसोस है कि उन पर गंभीरता से कोई अमल नहीं किया गया। बता दें कि अग्रवाल साल 2000 में रिटायर हो गए थे।
पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने आरोप लगाया कि राज्य की ज्यादातर जेलों में जेल प्रशासन स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है। इनमें से भी काफी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी वरिष्ठ जेल अधिकारियों के घरों की सुरक्षा में लगा दी जाती है।