धारा-497 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट में बहस छिड़ सकती है। इसके मुताबिक व्यभिचार (अडेल्ट्री) मामले में मर्द ही अपराधी क्यों माने जाते हैं, महिलाएं क्यों नहीं? इससे पहले पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने 150 वर्ष पूर्व इस कानूनी प्रावधान को प्रथम दृष्टया पुरातनकालीन बताया था।
शीर्ष अदालत का कहना था कि यह प्रावधान महिला और पुरुष को एक समान नजर से नहीं देखता। आपराधिक कानून पुरुष और स्त्रियों के लिए बराबर है लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा-497 में इस सिद्धांत का अभाव है। पीठ ने कहा था कि कोई कानून महिलाओं को यह कहते हुए संरक्षण नहीं दे सकता कि व्यभिचार के मामले में हमेशा महिला पीड़िता होती हैं।