फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हुड्डा के ही इर्द-गिर्द रहेगा हरियाणा में कांग्रेस का चुनावी संग्राम, पूर्व सीएम ने तंवर को दी पटखनी

Thu, 05 Sep 2019 05:06 AM IST
देव कश्यप अनूप वाजपेयी, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
Bhupinder singh hooda - फोटो : File Photo
विज्ञापन

हरियाणा में अशोक तंवर के बजाय कुमारी शैलजा की कांग्रेस अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में दिग्गज नेता व पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की स्थिति और मजबूत कर दी है। हुड्डा ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने दो ही शर्त रखी थी और दोनों पर ही मंजूरी की मुहर लग गई हैं। इससे यह तय हो गया है कि हरियाणा में कांग्रेस का चुनावी संग्राम फिलहाल हुड्डा के ही इर्द-गिर्द घूमता दिखाई देगा।

विज्ञापन


राज्य में विधानसभा चुनाव में कुछ ही महीने बचे हैं। ऐसे में बमुश्किल अब कुछ दिन ही विधानसभा सत्र चलेगा। इसके बावजूद हुड्डा ने विपक्ष के नेता की कुर्सी हासिल कर एक तीर से दो शिकार साधे हैं। एकतरफ इससे उनके समर्थकों का मनोबल बढ़ेगा, तो दूसरी तरफ राज्य में उनके राजनीतिक वजूद को नई धार मिलेगी। विधायक दल का नेता बनने से हुड्डा चुनावी उम्मीदवार तय करने वाली स्क्रीनिंग कमेटी की बैठकों में भी बतौर पदेन सदस्य मौजूद रहेंगे। साथ ही चुनाव प्रबंध समिति के चेयरमैन के तौर हुड्डा की तरफ से बुलाई गई बैठकों में शैलजा बतौर सदस्य मौजूद रहेंगी।

कांग्रेस नेतृत्व ने चुनाव के लिए राज्य की जनता के सामने दलित नेता के तौर कुमारी शैलजा को तो जाट नेता के तौर पर हुड्डा को पेश किया है। दरअसल हरियाणा में पहले 2014 के लोकसभा चुनाव, फिर विधानसभा चुनाव और अब 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को हार मिली है। इन पांच सालों में राज्य के बदले जातीय समीकरणों में पार्टी जाट-दलित मतों के मेल को विधानसभा चुनाव में जीतने की कुंजी मान रही है। हालांकि हुड्डा समर्थक मानते हैं कि पार्टी की तरफ से अपरोक्ष तौर पर हुड्डा को अपना चुनावी चेहरा बनाने का लाभ उन्हें जाट मतों में बिखराव नहीं होने से मिलेगा।

प्रदेश प्रभारी भी पूर्व सीएम के पक्ष में

कांग्रेस के हरियाणा प्रभारी गुलाम नबी आजाद का झुकाव भी हुड्डा की ओर ही है। वरिष्ठ नेता आजाद राज्य में दो पॉवर प्वाइंट होने के सवाल पर कहते हैं कि भविष्य में पार्टी को मजबूत बनकर चुनाव लड़ना है। ऐसे में संगठन भी मजबूत करना है और चुनाव प्रबंधन को भी सुगठित करना होगा। ये दोनों जिम्मेदारियां कुमारी शैलजा और भूपेंद्र हुड्डा को दी गई हैं। आजाद ने कहा, मुझे पूरा विश्वास है कि ये दोनों नेता इस काम को करने के लिए सक्षम हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें