केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि बेंगलुरु में होने वाली जी-20 के पर्यावरण और जलवायु स्थिरता समूह की बैठक कई मायनों में खास होगी। बैठक में इस बार भूमि क्षरण को रोकने की दिशा में पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली में तेजी लाने और जैव विविधता को समृद्ध करने के लिए स्थाई और जलवायु लचीली ब्लू इकॉनमी को बढ़ावा देने पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि बैठक में संसाधन दक्षता और अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के विषय पर भी सदस्य देशों के साथ परामर्श होगा।
ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि, पर जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों की कीमत पर नहीं
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसने जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को हासिल करने की अपनी प्रतिबद्धता को किसी भी तरह से कम किया है।
पुरी ने कहा, भारत का विकास वैश्विक विकास को गति देगा, क्योंकि यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। उन्होंने यह टिप्पणी यहां भारत ऊर्जा सप्ताह में 9वें एशियाई मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन के समापन सत्र में की, जिसका विषय था ‘स्थिर और सुरक्षित ऊर्जा मार्गों का मानचित्रण-ऊर्जा सुरक्षा, न्याय, विकास और नवाचार।’ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एशिया के भीतर आने वाले दशकों में भारत में ऊर्जा की मांग में सबसे ज्यादा वृद्धि होगी। भारतीय ऊर्जा की मांग 2021 के 1.86 करोड़ बैरल प्रतिदिन से बढ़कर 2045 में 3.77 करोड़ बैरल प्रतिदिन होने का अनुमान है। एजेंसी
विकास, जलवायु अनुकूल नीतियां बनाने पर जोर : भारत ऊर्जा सप्ताह को संबोधित करते हुए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उद्योग व उन्नत प्रौद्योगिकी मंत्री सुल्तान अल जबर ने कहा कि विकास के साथ ही जलवायु परिवर्तन अनुकूल नीतियां बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नीतियां ऐसी होनी चाहिए जो उत्सर्जन रोकें, विकास नहीं। यूएई भारत को चौथा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आपूर्तिकर्ता है।
ऊर्जा सुरक्षा अब वैश्विक नहीं : सेचिन
रूस की बड़ी तेल कंपनी रोजनेफ्ट के मुख्य कार्यकारी इगोर सेचिन ने भारत ऊर्जा सप्ताह में कहा कि कोई एकीकृत वैश्विक ऊर्जा बाजार नहीं है और ऊर्जा सुरक्षा अब वैश्विक भी नहीं है। उन्होंने कहा कि बाजार व्यापार के सभी सिद्धांतों को नष्ट कर दिया गया है और बाजार मूल्य निर्धारण और अनुबंध कानून को समाप्त कर दिया गया है।