असम की लोकसंस्कृति और संगीत को देश-दुनिया तक पहुंचाने वाले भारत रत्न भूपेन हजारिका की जन्मशती पर उनकी कर्मभूमि कोलकाता में तीन दिवसीय समारोह के जरिये उनकी विरासत को याद किया जा रहा है। उनके गीतों में निहित मानवता, सामाजिक न्याय, सांप्रदायिक सद्भाव और भाईचारे के संदेश को केंद्र में रखकर आयोजित कार्यक्रम में असम और पश्चिम बंगाल की साझा सांस्कृतिक विरासत की झलक भी देखने को मिली। 8 सितंबर को टॉलीगंज स्थित उनके आवास पर 100 मिट्टी के दीये जलाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी।
भूपेन हजारिका की जन्मशती वर्ष 2025 से शुरू होकर 2026 में देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों के साथ मनाई जा रही है। असम सरकार के सांस्कृतिक कार्य विभाग की ओर से भी इस अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
कोलकाता में रचे कई अमर गीत
कोलकाता भूपेन हजारिका के जीवन और रचनाकर्म का महत्वपूर्ण केंद्र रहा। शहर में बिताए वर्षों के दौरान उन्होंने कई रचनाएं कीं और यहां के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक वातावरण से गहरा रिश्ता बनाया। यही वजह है कि उनकी जन्मशती
के समारोह में कोलकाता की भूमिका केवल मेजबान शहर की नहीं, बल्कि उनकी रचनात्मक यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में सामने आ रही है। छह सितंबर को असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी टॉलीगंज स्थित उनके आवास का दौरा किया। असम के अपर मुख्य सचिव बी. कल्याण चक्रवर्ती ने कहा कि हजारिका केवल असम और पूर्वोत्तर के नहीं, बल्कि पूरे देश और उससे आगे के लोगों के कलाकार हैं।
समारोह की शुरुआत पांच सितंबर को मुकुंदापुर में ‘भूपेन दा अनकट’ वृत्तचित्र के प्रदर्शन से हुई। बोबीता शर्मा के निर्देशन में बनी फिल्म में करीब 25 वर्ष पहले लंदन में भूपेन हजारिका के साथ हुई बातचीत के दुर्लभ अंश शामिल हैं। संगीतकार बिक्रम घोष, अभिनेत्री जया सील और लेखिका नवमालती नियोग की मौजूदगी में इसका प्रदर्शन हुआ।
गीतों में दिखी असम-बंगाल की साझी विरासत
छह सितंबर को साल्टलेक स्थित असम भवन में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में लोकसाहित्य के अध्येता और लेखक शेख मकबूल इस्लाम ने भूपेन हजारिका की रचनाओं और व्यक्तित्व पर विचार रखे। इसके बाद मोना बनर्जी के नेतृत्व में प्रयास समूह ने उनके लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए। किशोरी गायिका कनुशी बरुआ ने असमिया, हिंदी और बांग्ला में गीत गाए। कोलकाता में भूपेन हजारिका के करीबी सहयोगी रहे गायक मिथुन धर ने उनके साथ बिताए समय की स्मृतियां साझा कीं। कथक आधारित प्रस्तुति के साथ असम और बंगाल की लोक एवं शास्त्रीय परंपराओं को जोड़ता फ्यूजन नृत्य भी प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने भूपेन हजारिका की कविताओं और साहित्यिक रचनाओं पर आधारित नृत्य, पाठ और संगीत से सजी प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त गायिका एवं संगीतकार तराली शर्मा ने भूपेन हजारिका के लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति से किया। इस अवसर पर कोलकाता असमिया सांस्कृतिक संघ की त्रिभाषी वार्षिक पत्रिका ‘सृष्टि’ के जन्मशती विशेषांक का भी विमोचन किया गया।
100 दीयों से अंतिम श्रद्धांजलि
भूपेन हजारिका का संगीत भाषाई और भौगोलिक सीमाओं से आगे जाकर मानवता की बात करता रहा। उनके गीत असमिया के अलावा बांग्ला और हिंदी समेत कई भाषाओं में लोकप्रिय हुए। उनकी रचनाओं ने असम और पूर्वोत्तर की लोकधुनों को राष्ट्रीय सांस्कृतिक परिदृश्य में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी जन्मशती पर देशभर में हो रहे आयोजनों में भी उनके मानवीय संदेश और सांस्कृतिक एकता की विरासत को प्रमुखता दी जा रही है।
कोलकाता में समारोह का अंतिम चरण 8 सितंबर को शाम छह गोल्फ क्लब रोड स्थित उनके आवास पर होगा। टॉलीगंज और कोलकाता के लोग वहां 100 मिट्टी के दीये जलाकर महान कलाकार को श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद मूक नाट्य प्रस्तुति के जरिये उनकी स्मृतियों और रचनात्मक विरासत को याद किया जाएगा।