सार
कोलकाता में भोगाली बिहू पर 'रूपोही हाट' का आयोजन हुआ, जिसका उद्घाटन छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने किया। इस मौके पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक एकता पर जोर दिया। मेले में असम और नागालैंड के कारीगर शामिल हुए, जबकि छत्तीसगढ़ गेस्ट स्टेट रहा।
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने ‘रूपोही हाट’ का किया उद्घाटन
- फोटो : अमर उजाला
असम के फसल उत्सव 'भोगाली बिहू' के मौके पर कोलकाता में जश्न का माहौल रहा। कोलकाता असमिया सांस्कृतिक संघ ने असम भवन परिसर में 'रूपोही हाट' और सामुदायिक भोज 'उरुका' का आयोजन किया। इस कार्यक्रम ने असम की संस्कृति, परंपरा और पूर्वोत्तर के उत्पादों की विरासत को शानदार तरीके से पेश किया।
इस साल 'रूपोही हाट' का उद्घाटन छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने किया। उन्होंने पारंपरिक असमिया 'नोंगोला' शैली में बने गेट का उद्घाटन करके मेले की शुरुआत की। इस मौके पर संघ के अध्यक्ष डॉ. खनिंद्र पाठक, असम भवन के संयुक्त रेजिडेंट कमिश्नर रणदीप दाम और मुख्य सलाहकार देव सोनोवाल समेत कई खास लोग मौजूद थे।
राज्यपाल रमेन डेका ने अपने भाषण में महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण बचाने पर जोर दिया। उन्होंने लोगों से अपील की कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वे कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं और उसकी देखभाल करें। उन्होंने यह भी कहा कि हर भाषा और संस्कृति की अपनी पहचान होती है। संस्कृतियां एक-दूसरे से मुकाबला नहीं करतीं, बल्कि एक-दूसरे को पूरा करती हैं।
'रूपोही हाट' की शुरुआत 2023 में हुई थी। यह मंच असम के सुआलकुची, बरपेटा, श्रीभूमि, चिरांग, गुवाहाटी और नागालैंड के कारीगरों और उद्यमियों को मौका देता है। इस बार छत्तीसगढ़ को गेस्ट स्टेट बनाया गया था और वहां के स्टॉल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे।
कार्यक्रम के अंत में करीब 400 लोगों ने पारंपरिक भोज का आनंद लिया। इससे पहले 'मेजी' (अग्निकुंड) जलाकर सुख-समृद्धि की प्रार्थना की गई। सांस्कृतिक शाम में कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। इस आयोजन का मकसद कोलकाता में रहने वाले युवाओं को असमिया भाषा, साहित्य और संस्कृति से जोड़ना था।
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