भाजपा के लिए जम्मू-कश्मीर में अपनी ही सरकार गिराना आसान नहीं था, लेकिन बढ़ती आतंकी घटनाओं और इसी महीने शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पीडीपी के संबंध तोड़ना जरूरी हो गया था। शनिवार को जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के मौके पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जम्मू जा रहे हैं।
अगले बुधवार से ही श्रीनगर होकर जाने वाली अमरनाथ यात्रा शुरू हो रही है। आतंकी संगठनों ने यात्रा पर हमले की धमकी दी है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती इन आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के बजाय उनसे बातचीत पर जोर दे रही थीं। वह एकतरफा संघर्ष-विराम बढ़ाने की मांग भी कर रही थीं।
बढ़ जाएगी भाजपा की जिम्मेदारी
सूबे में राज्यपाल शासन लागू होने के बाद भाजपा की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी, क्योंकि केंद्र में भी उसकी ही सरकार है। अब किसी भी चूक पर महबूबा को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
लोगों की भावनाओं को दी तरजीह
भाजपा के लिए जम्मू क्षेत्र का विकास और वहां के लोगों की भावनाओं की कद्र करना सरकार चलाने से कहीं ज्यादा अहम था। कठुआ कांड में स्थानीय लोगों की गिरफ्तारी के बाद लोगों का मानना था कि राज्य सरकार पीडीपी के इशारे पर निर्दोषों को फंसा रही थी। भाजपा का उपमुख्यमंत्री होने के बावजूद पार्टी उन्हें बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही।