मोरारी बापू ने श्रद्धालुओं से की अपील
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भारत स्वस्तिक यात्रा ओंकारेश्वर पहुंच चुकी है, जहां गुरुवार को मोरारी बापू ने राम की कथा सुनाईई, जिसमें उन्होंने कहा कि नवरात्रि में शक्ति की पूजा की जाती है। श्रद्धालुओं से भावुक अपील करते हुए बापू ने कहा, शक्ति की उपासना में समस्त जीवों के प्रति करुणा और श्रद्धा का भाव होना चाहिए। पशु बलि अब बंद होनी चाहिए। इस दौरान मोरारी बापू ने धर्म के नाम पर पशु बलि को रोकने की अपील भी की है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर पूजा के समय पशु बलि दी जाती है, जो सर्वथा अनुचित है। उन्होंने करुणा और दया को धर्म का मूल आधार बताया।
अहंकार से मुक्त होना सर्वोपरि
मोरारी बापू ने कथा में अभिमान के विभिन्न रूपों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि इनमें सबसे श्रेष्ठ अवस्था निरभिमान है अर्थात् अहंकार से मुक्त होना ही सर्वोपरि है। किसी व्यक्ति केपास कोई योग्यता, ज्ञान या संपत्ति हो और उसके कारण उसमें अभिमान आ जाए तो यह भी उचित नहीं है।
ओंकार का स्वस्तिक से गहरा संबंध
भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन के बाद मोरारी बापू ने कहा कि ओंकार का स्वस्तिक से गहरा संबंध है, यह आदि नाद का प्रतीक है। सनातन धर्म में ओंकारेश्वर की भूमि का विशिष्ट महत्व है, क्योंकि इसका संबंध आदि शंकराचार्य और उनके गुरु गोविंद भगवत्पाद की भेंट से है। शंकराचार्य की आध्यात्मिक यात्रा को दिशा देने वाली गुरु-शिष्य परंपरा की अभिव्यक्ति इसी पवित्र भूमि में दिखाई देती है।