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Bharat Jodo Yatra: कर्नाटक के रण में क्यों कूदीं सोनिया गांधी, क्या यहीं से बदलेगा कांग्रेस का भाग्य?

अमित शर्मा
Updated Thu, 06 Oct 2022 11:24 PM IST

सार

Bharat Jodo Yatra: कर्नाटक में दलित समुदाय के मतदाताओं की संख्या लगभग 23 फीसदी है। मल्लिकार्जुन खड़गे स्वयं दलित समुदाय से हैं और राज्य के दलितों के बीच वे एक बड़े नेता के तौर पर देखे जाते हैं। ऐसे में खडगे के अध्यक्ष बनने से इन मतदाताओं में अतिरिक्त उत्साह हो सकता है, जो कांग्रेस की इस राज्य में सत्ता में वापसी की राह तैयार कर सकता है...
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Rahul Gandhi tying the shoelaces of Sonia Gandhi during Bharat Jodo Yatra - फोटो : Agency

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार को कर्नाटक में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में भागीदारी की। कमजोर स्वास्थ्य के बीच भी वे भारत जोड़ो यात्रा के अन्य यात्रियों के साथ कुछ देर चलीं। कुछ देर बाद राहुल गांधी ने उनके खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर उन्हें वापस भेजा, लेकिन कुछ देर आराम करने के बाद वे दोबारा यात्रा में पहुंचीं और यात्रा में भागीदारी की। बड़ा प्रश्न है कि  सोनिया गांधी ने कर्नाटक में यात्रा में भागीदारी करने का निर्णय क्यों लिया? क्या कर्नाटक से ही कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन का दौर थम जाएगा और पार्टी वापसी करने में कामयाब रहेगी?

कर्नाटक से आते हैं खड़गे

दरअसल, कांग्रेस के लिए दक्षिण भारत में कर्नाटक बेहद महत्त्वपूर्ण राज्य है। यह उन चंद राज्यों में है जहां कांग्रेस पार्टी आज भी बहुत मजबूत स्थिति में है और अगले विधानसभा चुनाव में वह यहां वापसी भी कर सकती है। चूंकि, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे इसी राज्य से आते हैं, ऐसे में यदि वे कांग्रेस के अध्यक्ष चुन लिए जाते हैं (जिसकी संभावना ज्यादा है) तो इससे पार्टी को यहां अतिरिक्त मजबूती मिलेगी और पार्टी की दावेदारी ज्यादा मजबूत हो जाएगी।

कर्नाटक में दलित समुदाय के मतदाताओं की संख्या लगभग एक चौथाई (23 फीसदी) है। मल्लिकार्जुन खड़गे स्वयं दलित समुदाय से हैं और राज्य के दलितों के बीच वे एक बड़े नेता के तौर पर देखे जाते हैं। ऐसे में खडगे के अध्यक्ष बनने से इन मतदाताओं में अतिरिक्त उत्साह हो सकता है, जो कांग्रेस की इस राज्य में सत्ता में वापसी की राह तैयार कर सकता है। यदि कांग्रेस यहां वापसी करने में कामयाब होती है तो यह उसके लिए बूस्टर डोज़ साबित होगा और उसका असर दक्षिण भारत के अन्य राज्यों पर ही नहीं, उत्तर भारत के राज्यों पर भी पड़ेगा।

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Rahul Gandhi tying the shoelaces of Sonia Gandhi during Bharat Jodo Yatra - फोटो : Agency
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार को कर्नाटक में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में भागीदारी की। कमजोर स्वास्थ्य के बीच भी वे भारत जोड़ो यात्रा के अन्य यात्रियों के साथ कुछ देर चलीं। कुछ देर बाद राहुल गांधी ने उनके खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर उन्हें वापस भेजा, लेकिन कुछ देर आराम करने के बाद वे दोबारा यात्रा में पहुंचीं और यात्रा में भागीदारी की। बड़ा प्रश्न है कि  सोनिया गांधी ने कर्नाटक में यात्रा में भागीदारी करने का निर्णय क्यों लिया? क्या कर्नाटक से ही कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन का दौर थम जाएगा और पार्टी वापसी करने में कामयाब रहेगी?

कर्नाटक से आते हैं खड़गे

दरअसल, कांग्रेस के लिए दक्षिण भारत में कर्नाटक बेहद महत्त्वपूर्ण राज्य है। यह उन चंद राज्यों में है जहां कांग्रेस पार्टी आज भी बहुत मजबूत स्थिति में है और अगले विधानसभा चुनाव में वह यहां वापसी भी कर सकती है। चूंकि, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे इसी राज्य से आते हैं, ऐसे में यदि वे कांग्रेस के अध्यक्ष चुन लिए जाते हैं (जिसकी संभावना ज्यादा है) तो इससे पार्टी को यहां अतिरिक्त मजबूती मिलेगी और पार्टी की दावेदारी ज्यादा मजबूत हो जाएगी।

कर्नाटक में दलित समुदाय के मतदाताओं की संख्या लगभग एक चौथाई (23 फीसदी) है। मल्लिकार्जुन खड़गे स्वयं दलित समुदाय से हैं और राज्य के दलितों के बीच वे एक बड़े नेता के तौर पर देखे जाते हैं। ऐसे में खडगे के अध्यक्ष बनने से इन मतदाताओं में अतिरिक्त उत्साह हो सकता है, जो कांग्रेस की इस राज्य में सत्ता में वापसी की राह तैयार कर सकता है। यदि कांग्रेस यहां वापसी करने में कामयाब होती है तो यह उसके लिए बूस्टर डोज़ साबित होगा और उसका असर दक्षिण भारत के अन्य राज्यों पर ही नहीं, उत्तर भारत के राज्यों पर भी पड़ेगा।

Rahul Gandhi and Sonia Gandhi during Bharat Jodo Yatra - फोटो : Agency

कर्नाटक में बदलेंगे सरकार- कांग्रेस

भारत जोड़ो यात्रा की मीडिया कोओर्डिनेटर ऋतु चौधरी ने अमर उजाला से कहा कि यह राजनीतिक यात्रा नहीं है और इसके जरिए राहुल गांधी किसी राज्य की सत्ता हासिल करने के लिए नहीं निकले हैं। बल्कि वे इस देश और देश की जनता की समस्याएं समझना चाहते हैं और वे पूरी यात्रा में यही कोशिश कर रहे हैं।

हालांकि, कांग्रेस नेता ने दावा किया कि कर्नाटक में इस यात्रा को जितना अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है, उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि जनता बदलाव के मूड में है और कांग्रेस इस बार यहां पूरी मजबूती के साथ सत्ता में वापसी करेगी। उन्होंने बताया कि सोनिया गांधी के भारत यात्रा में जुड़ने से आज भारी संख्या में स्थानीय लोग यात्रा में शामिल होने के लिए उमड़ पड़े। यह भीड़ बताती है कि यहां के लोग कांग्रेस की ओर आज भी बहुत उम्मीद के साथ देख रहे हैं।

ऋतु चौधरी ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों से हिजाब जैसे विवाद उठाकर यहां के मतदाताओं को धार्मिक आधार पर बांटने की कोशिश की जा रही है। लेकिन भाजपा का यह दांव उलटा पड़ रहा है। लोग इस विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं और वे यहां ऐसी सरकार चाहते हैं जो समाज के सभी वर्गों को एक साथ लेकर चल सके। उन्होने कहा कि कर्नाटक में आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बड़ी जीत हासिल करने में कामयाब रहेगी।         

पहले भी रहा है सोनिया का कनैक्शन

दरअसल, कर्नाटक से सोनिया गांधी का पहले भी करीबी संबंध रहा है। भाजपा ने जब उन्हें यूपी में घेरकर लोकसभा चुनाव में हराने की योजना बनाई थी, तब सोनिया गांधी ने अपने लिए इसी कर्नाटक के बेल्लारी सीट का चुनाव किया था। भाजपा ने अपनी तेजतर्रार नेता सुषमा स्वराज को यहां सोनिया गांधी का मुक़ाबला करने भेजा था, लेकिन वे बुरी तरह असफल रहीं थीं और सोनिया गांधी ने बड़ी जीत हासिल की। इसके पहले भी कांग्रेस की जड़ें यहां मजबूत रही हैं और संभवतया यही कारण है कि कांग्रेस ने भारत यात्रा जोड़ो के लिए दक्षिण में इतना समय देना सही समझा।
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