कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार को कर्नाटक में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में भागीदारी की। कमजोर स्वास्थ्य के बीच भी वे भारत जोड़ो यात्रा के अन्य यात्रियों के साथ कुछ देर चलीं। कुछ देर बाद राहुल गांधी ने उनके खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर उन्हें वापस भेजा, लेकिन कुछ देर आराम करने के बाद वे दोबारा यात्रा में पहुंचीं और यात्रा में भागीदारी की। बड़ा प्रश्न है कि सोनिया गांधी ने कर्नाटक में यात्रा में भागीदारी करने का निर्णय क्यों लिया? क्या कर्नाटक से ही कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन का दौर थम जाएगा और पार्टी वापसी करने में कामयाब रहेगी?
दरअसल, कांग्रेस के लिए दक्षिण भारत में कर्नाटक बेहद महत्त्वपूर्ण राज्य है। यह उन चंद राज्यों में है जहां कांग्रेस पार्टी आज भी बहुत मजबूत स्थिति में है और अगले विधानसभा चुनाव में वह यहां वापसी भी कर सकती है। चूंकि, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे इसी राज्य से आते हैं, ऐसे में यदि वे कांग्रेस के अध्यक्ष चुन लिए जाते हैं (जिसकी संभावना ज्यादा है) तो इससे पार्टी को यहां अतिरिक्त मजबूती मिलेगी और पार्टी की दावेदारी ज्यादा मजबूत हो जाएगी।
कर्नाटक में दलित समुदाय के मतदाताओं की संख्या लगभग एक चौथाई (23 फीसदी) है। मल्लिकार्जुन खड़गे स्वयं दलित समुदाय से हैं और राज्य के दलितों के बीच वे एक बड़े नेता के तौर पर देखे जाते हैं। ऐसे में खडगे के अध्यक्ष बनने से इन मतदाताओं में अतिरिक्त उत्साह हो सकता है, जो कांग्रेस की इस राज्य में सत्ता में वापसी की राह तैयार कर सकता है। यदि कांग्रेस यहां वापसी करने में कामयाब होती है तो यह उसके लिए बूस्टर डोज़ साबित होगा और उसका असर दक्षिण भारत के अन्य राज्यों पर ही नहीं, उत्तर भारत के राज्यों पर भी पड़ेगा।