उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को सत्ता से बाहर हुए तकरीबन तीन दशक से ज्यादा का वक्त हो गया। इस दौरान पार्टी तमाम उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन जब पूरे देश में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा गुजर रही है तो उसमें तीन दशक से सत्ता के सूखे गलियारे में महज तीन दिन की राहुल गांधी की यह यात्रा कितना खाद पानी डाल पाएगी। इसको लेकर सियासी चर्चाएं हो रही हैं। चर्चाएं तो इस बात की भी हो रही है क्या राहुल गांधी की यात्रा के बाद कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 2009 का अपना पुराना प्रदर्शन दोहरा पाएगी।
उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी की महज तीन दिनों की यात्रा को को लेकर सियासी गलियारों में तमाम तरह की चर्चाएं हो रही हैं। राजनैतिक विश्लेषक हरिहर पांडे कहते हैं कि यह बात दीगर है कि राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में महज तीन दिन के लिए ही आए, लेकिन जिस तरीके का माहौल पार्टी के भीतर उनकी यात्रा को सफल बनाने के लिए चला वह पार्टी के लिए शुभ संकेत है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि राहुल गांधी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों से होकर हरियाणा की ओर निकल रहे हों, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने झांसी से लेकर बलिया तक और बनारस से लेकर अवध क्षेत्र तक में जिस तरीके से मंथन किया है और कार्यकर्ताओं से जुड़कर यात्रा को सफल बनाने की मुहिम चलाई वह 2024 लोकसभा के चुनावों में अपना असर भी दिखाएगी। उनका कहना है कि तीन दिन के लिए ही सही लेकिन उत्तर प्रदेश के कोने-कोने से लोग राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को सफल बनाने के लिए दिन रात एक कर के जुटे हुए थे।
दरअसल, उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी की इस भारत जोड़ो यात्रा को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसलिए भी कर रही है क्योंकि कांग्रेस 1989 से उत्तर प्रदेश में सत्ता से बाहर है। 2019 के लोकसभा चुनाव में तो हालात इतने बिगड़े कि राहुल गांधी खुद अपनी परंपरागत सीट अमेठी से ही चुनाव हार गए। राजनैतिक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं कांग्रेस राहुल गांधी की तीन दिन की यात्रा से उत्तर प्रदेश में मजबूत खाद पानी के तौर पर देख रही है। शुक्ला कहते हैं कि 30 साल का राजनीतिक सूखा तीन दिन की भारत जोड़ो यात्रा से तो दूर नहीं होने वाला है, लेकिन वह कांग्रेस के लिए एक उम्मीद भरी बात जरूर कहते हैं, उनका मानना है कि जिस तरीके से पार्टी ने इन तीन दिनों की यात्रा को सफल बनाने के लिए अलग-अलग इलाकों में जाकर मेहनत की है वह जरूर 2024 के लोकसभा चुनावों में कुछ असर दिखा सकती है।
उत्तर प्रदेश के सियासी जानकारों का कहना है कि 2009 के बाद कांग्रेस पार्टी अपने सबसे बुरे दौर में चल रही है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अगर पार्टी अपने 2009 के प्रदर्शन को ही आधार मान ले तो 2024 में कांग्रेस पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश में बहुत कुछ आसान हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषक ओपी मिश्रा कहते हैं कि लेकिन उसके लिए राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का महज कुछ जिलों से होकर गुजर जाना असरकारी नहीं होगा। पार्टी अगर 2009 के प्रदर्शन को ही आगे बढ़ाना चाहती है तो उसके लिए बड़ी रणनीति और महत्वपूर्ण भूमिका वाले नेताओं को उत्तर प्रदेश की राजनैतिक जमीन पर तो उतरना ही होगा। मिश्रा कहते हैं कि 2019 में तो कांग्रेस पार्टी ने मानो एक तरह से उत्तर प्रदेश में सरेंडर ही कर दिया था। राहुल गांधी अपनी परंपरागत सीट अमेठी को ही हार गए थे। इसलिए कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा को महज पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों से होकर गुजरने और उसका पूरा असर उत्तर प्रदेश में देखने जैसा कुछ देखना तो ठीक नहीं है। लेकिन यह जरूर है कि इसी बहाने कांग्रेस अपने संगठन को इकट्ठा कर दूसरे बड़े आंदोलनों और कार्यक्रमों के माध्यम से पार्टी को मजबूत करने का सिलसिला तो शुरू ही कर सकती है
कांग्रेस से जुड़े वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए अपनी पूरी तैयारियां कर दी है। पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि जिस तरीके से बीते डेढ़ महीने के भीतर पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अपने कार्यकर्ताओं को जोड़ना शुरु किया है वह एक बहुत ही सकारात्मक संदेश है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस पार्टी से जुड़े वरिष्ठ एक नेता कहते हैं कि राहुल गांधी की तीन दिन की यात्रा को लेकर जिस तरीके से पार्टी ने पूरे प्रदेश में एक बड़ा अभियान लोगों को जोड़ने का और यात्रा को सफल बनाने के लिए चलाया उसे पार्टी के भीतर एक नई ऊर्जा पैदा हुई है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस पार्टी से जुड़े विपुल बाजपेई कहते हैं कि भले ही राहुल गांधी की यात्रा उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों से होकर कहे गुजरी है लेकिन इतने जिलों की दिन की यात्रा के लिए जिस तरीके से पार्टी ने एक व्यापक अभियान चलाकर लोगों से संपर्क किया वह वाले दिनों में बड़े संकेत दे रहा है।