कांग्रेस ने सात सितंबर से ‘भारत जोड़ो यात्रा’ (Bharat Jodo Yatra) शुरू करने की योजना बनाई है। 150 दिनों तक चलने वाली 3500 किलोमीटर लंबी इस यात्रा की शुरुआत देश के दक्षिणी हिस्से के कन्याकुमारी से होगी और विभिन्न राज्यों से गुजरते हुए उत्तर के कश्मीर में इसका समापन होगा। पार्टी ने इस यात्रा की योजना ऐसे समय में बनाई है जब नीतीश कुमार और अरविंद केजरीवाल जैसे नेता प्रधानमंत्री पद के लिए अपनी-अपनी दावेदारी ठोकना शुरू कर चुके हैं, तो पार्टी के अंदर भी आनंद शर्मा और गुलाम नबी आजाद जैसे नेता पार्टी से अलग रुख अपनाते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। विपरीत राजनीतिक हालात में भी अखिल भारतीय यात्रा के माध्यम से कांग्रेस ने कई गंभीर सवालों का जवाब देने की कोशिश की है। उसने यह संकेत देने की कोशिश भी की है कि वह सीबीआई और ईडी की छापेमारी से न तो दबाव में आएगी और न ही अपना राजनीतिक अभियान कमजोर पड़ने देगी।
कांग्रेस (Congress) की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पार्टी अपने नए अध्यक्ष को लेकर मंथन कर रही है। 21 अगस्त से पार्टी अध्यक्ष के लिए शुरू हुई चुनावी प्रक्रिया 20 सितंबर तक समाप्त हो जाएगी। सितंबर में यह तय हो जाएगा कि पार्टी का अध्यक्ष कौन होगा। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने गांधी परिवार से अलग अध्यक्ष बनाने तक की बात कही थी, लेकिन जिस समय पार्टी अध्यक्ष का चुनाव हो रहा है, उसी समय राहुल गांधी के द्वारा भारत जोड़ो यात्रा शुरू करने से यह संकेत मिल जाता है कि वे अध्यक्ष पद पर न रहने के बाद भी पार्टी को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।
2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर अभी से यह सवाल किए जा रहे हैं कि इस लड़ाई में विपक्षी दलों में आपसी सहयोग कैसे बनेगा। यदि ऐसा कोई गठबंधन बनता है तो इसका नेतृत्व कौन करेगा। भारत जोड़ो यात्रा परोक्ष रूप से इन सारे सवालों का जवाब दे देती है। पार्टी ने भारत जोड़ो यात्रा को राजनीतिक होते हुए भी सभी के लिए खुला रखने की बात कही है। इसमें दूसरे दल भी साथ आ सकते हैं। माना जा सकता है कि जो दल इस यात्रा में कांग्रेस के साथ आने के लिए तैयार होंगे, वे विपक्षी दलों के गठबंधन का नेतृत्व कांग्रेस के हाथ में होने की बात से इनकार नहीं करेंगे।
भारत जोड़ो यात्रा ऐसे समय में आयोजित हो रही है, जब विपक्ष के कई नेता स्वयं को पीएम पद का दावेदार बताने में जुटे हुए हैं। नीतीश कुमार, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी और केसीआर को उनकी पार्टियां अभी से पीएम मटेरियल बताने में जुट गई हैं। इसमें से किसी भी राजनीतिक दल की यह हैसियत नहीं है कि वह कांग्रेस के बिना इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने का सपना भी देख सके। कांग्रेस को अपने इस राजनीतिक महत्व का बखूबी भान है, लिहाजा उसने अपनी अखिल भारतीय स्तर पर अपनी हैसियत मजबूत करने की कोशिश शुरू कर दी है। उसे पता है कि वह कोई मोलभाव करने की स्थिति में तभी होगी जबकि उसके पास सीटों की एक सम्मानजनक संख्या होगी। भारत जोड़ो यात्रा उसकी इन्हीं उम्मीदों को पंख लगाने वाली कोशिश साबित हो सकती है।
आज की तारीख में इस बात की कल्पना करना मुश्किल है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली भाजपा 2024 की लड़ाई में पिछड़ने वाली है, लेकिन किसी कारण ऐसी परिस्थिति पैदा होती है (जैसा कि 2004 में शाइनिंग इंडिया के साथ हो चुका है) तो उसमें कांग्रेस की भूमिका बेहद महत्त्वपूर्ण होगी। पार्टी उस संभावित परिस्थिति के लिए अपनी दावेदारी किसी भी तरह कमजोर नहीं होने देना चाहती।
इन सारे किंतु-परंतु का जवाब केवल तभी मिल पाएगा, जबकि कांग्रेस अपने आधार वोट में विस्तार कर सम्मानजनक सीटें लाने की स्थिति में आ सकेगी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पार्टी इसी रणनीति में जुटी हुई है। भारत जोड़ो यात्रा कांग्रेस पार्टी की लोगों से जुड़ने की यात्रा है। पार्टी ने बेहद समझदारी भरी रणनीति अपनाते हुए इस यात्रा में सिविल सोसाइटी के लोगों को आगे रख रही है। इससे समाज के ज्यादा लोगों को उससे जुड़ने में मदद मिल सकेगी।
कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब पर भारत जोड़ो यात्रा के बारे में सूचना देते हुए मीडिया को बताया कि यह यात्रा सिविल सोसाइटी के लोगों के द्वारा आगे बढ़ाई जाएगी। इसमें देश के 22 राज्यों से लगभग 150 सिविल सोसाइटी के लोगों से बातचीत की गई है। सोमवार सुबह राहुल गांधी ने सिविल सोसाइटी के लोगों से मुलाकात की थी और कांस्टीट्यूशन क्लब में उनके सवालों के जवाब दिए।
राहुल गांधी ने सिविल सोसाइटी के लोगों को यह आश्वस्त करने की कोशिश की कि यह यात्रा देश के तीन मुख्य स्तंभों- आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक- को मजबूत बनाने के लिए की जा रही है। इसमें उनकी भूमिका बेहद आवश्यक है। यदि राहुल गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस प्रमुख संवैधानिक मुद्दों पर सिविल सोसाइटी के लोगों को अपने साथ जोड़ने में कामयाब होती है, और उसे जनता का साथ मिल पाता है तो माना जा सकता है कि उसके पांव दोबारा जमीन पर मजबूत हो सकते हैं।