कृष्णा एला ने कहा कि शुरुआत में टीके की लागत थोड़ी अधिक हो सकती है। जैसे-जैसे उत्पादन का पैमाना बढ़ता जाएगा, कीमत बाजार द्वारा नियंत्रित होती चली जाएगी। उन्होंने कहा कि हम टीकाकरण का परीक्षण करते हैं और फिर सुरक्षा और प्रभावकारिता की निगरानी करते हैं।
क्या कोरोना के नए स्ट्रेन पर काम करेगी वैक्सीन?
मीडिया ने जब उनसे सवाल किया कि क्या COVAXIN वायरस के नए रूप पर प्रभावी होगा तो उन्होंने कहा कि मुझे एक सप्ताह का समय दें, मैं आपको एक सुनिश्चित डाटा दूंगा। एला ने कहा कि हम जितनी जल्दी हो सके वैक्सीन को रोल आउट करेंगे। इसे पहले ही कसौली की सरकारी परीक्षण प्रयोगशाला में भेजा जा चुका है।
उन्होंने कहा कि यह एक टीका है। यह बैकअप नहीं है। ऐसे बयान देने से पहले लोगों को जिम्मेदार होना चाहिए। बता दें कि AIIMS के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा था कि भारत बायोटेक के टीके को बैकअप के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि जब कोरोना मामलों में अचानक वृद्धि होती है तो आपातकाल स्थिति में हमें टीकाकरण करने की आवश्यकता होती है, ऐसे में भारत बायोटेक की वैक्सीन का उपयोग बैकअप के रूप में किया जा सकता है।
भारत बायोटेक के एमडी ने कहा कि मैं नहीं जानता कि भारतीय कंपनियां हमेशा दुनिया में हर किसी के निशाने पर क्यों रहती हैं। आपातकालीन चिकित्सा लाइसेंस जारी करना एक वैश्विक अभ्यास है। यहां तक कि अमेरिका का कहना है कि अगर आपके पास अच्छा टीकाकरण डेटा है, तो आपातकालीन प्राधिकरण किया जा सकता है।
कोवैक्सिन की दो-खुराक लेनी होगी। 12 साल से अधिक उम्र के लिए हमारे पास ही अभी एकमात्र टीका है। हम प्रोटोकॉल के अनुसार जल्द ही बच्चों के परीक्षण करने की योजना बना रहे हैं। कोवाक्सिन ने 10 फीसदी से कम प्रतिकूल प्रतिक्रियाएं दिखाई हैं, जबकि अन्य में 60-70 फीसदी प्रतिकूल प्रतिक्रियाएं हैं। एस्ट्राजेनेका ने वॉलेंटियर को ऐसी प्रतिक्रियाओं को दबाने के लिए 4जी पेरासिटामॉल दे रहा था। हमने किसी भी वॉलेंटियर को पेरासिटामोल नहीं दिया है। मैं आश्वस्त कर सकता हूं कि हमारा टीका 200 फीसदी सुरक्षित है।
ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) द्वारा भारत बायोटेक की कोरोना वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’ की मंजूरी मिलने के बाद जहां कई लोग इसपर सवाल उठा रहे हैं वहीं इस कंपनी को एक बड़ी सफलता मिली है। दरअसल ब्राजील की एक प्राइवेट हेल्थ क्लीनिक एसोसिएशन ने भारत बायोटेक से कोरोनावायरस की वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’ की 50 लाख डोज की खरीद को लेकर बातचीत की है। बता दें कि DCGI ने रविवार को कोवैक्सीन और सीरम इंस्टीट्यूट की वैक्सीन कोविशील्ड के आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे दी है>
ब्राजीलियन एसोसिएशन ऑफ वैक्सीन क्लीनिक्स ने अपनी वेबसाइट पर पुष्टि करते हुए कहा है कि भारत की स्वदेशी वैक्सीन ‘कोवैक्सिन’ को खरीदने के लिए भारतीय फर्म के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जो वर्तमान में क्लीनिकल ट्रायल के अंतिम चरण में है। हालांकि ब्राजील की स्वास्थ्य नियामक इकाई द्वारा इस समझौते पर मुहर लगनी अभी बाकी है।