हमरो सिक्किम पार्टी (एचएसपी) ने रविवार को आयोजित एक सम्मेलन में सिक्किम में इनर लाइन परमिट (आईएलपी) प्रणाली को लागू करने की मांग की। गौरतलब है कि भारतीय फुटबाल टीम के पूर्व कप्तान बाईचुंग भूटिया इस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि कई देशों के साथ सीमा साझा करने वाले हिमालयी राज्य को इनर लाइन परमिट (आईएलपी) प्रणाली के तहत लाया जाए। उन्होने कहा कि अगर आईएलपी लागू होगा तभी संविधान का अनुच्छेद 371 (एफ) की रक्षा हो सकेगी। बता दें कि यह अधिनियम सिक्किम के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा करता है।
बाईचुंग भूटिया ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य और केंद्र सरकारों से पूर्वोत्तर भारत के इस राज्य में आईएलपी को लागू करने का अनुरोध करेगें। उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर एक सम्मेलन आयोजित किया गया था। सम्मेलन में विभिन्न सामाजिक और आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था। भारतीय फुटबाल टीम के पूर्व कप्तान ने इस दौरान एक बड़ा एलान भी किया। उन्होंने कहा कि एचएसपी इनर लाइन परमिट के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए राज्य भर में एक यात्रा शुरू करेगी। बाईचुंग भूटिया ने आगे कहा कि हम आईएलपी के लिए तब तक संघर्ष करते रहेंगे जब तक कि इसे सिक्किम में स्वीकार नहीं कर लिया जाता।
भूटिया ने इस दौरान राज्य में बड़ी संख्या में बाहरी लोगों के रहने और नकली दस्तावेजों पर विभिन्न सामाजिक लाभों का लाभ उठाने के साथ सिक्किम में जनसांख्यिकीय संतुलन के खतरे पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, सिक्किम में बाहर से बड़ी संख्या में लोग रह रहे हैं और उनके पास मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड नकली पहचान प्रमाण पत्र और आधार कार्ड के आधार पर हैं। ये लोग सिक्किम के लोगों के अधिकारों को हानि पहुंचाते हैं।
वहीं, इस सम्मेलन के दौरान अपने संबोधन में अन्य वक्ताओं ने कहा कि पूर्वोत्तर के इस राज्य के लिए आईएलपी जरूरी है। क्योंकि सिक्किम, चीन, नेपाल और भूटान के साथ सीमा साझा करता है। इस कारण यहां सुरक्षा संबंधी कारण हैं। इतना ही नहीं वक्ताओं ने यह भी बताया कि बड़ी संख्या में बाहरी लोगों की आमद स्थानीय लोगों के लिए बेरोजगारी पैदा कर रही है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि सिक्किम सरकार को आईएलपी को लागू करने के लिए एक प्रस्ताव पारित करना चाहिए और इसे राज्य की आधिकारिक मांग के रूप में केंद्र को भेजना चाहिए।
क्या है आईएलपी?
लद्दाख, अरूणाचल प्रदेश, नागालैंड, मेघालय, लक्ष्यद्वीप जैसी जगहों पर जाने के लिए इनर लाइन परमिट की जरूरत पड़ती है। ये परमिट एक आधिकारिक दस्तावेज है जो किसी भी भारतीय नागरिक को एक निश्चित अवधि के लिए इन खास जगहों पर जाने की अनुमति देता है।
हालांकि इस परमिट को लेना बहुत कठिन नहीं है। बस पहचान पत्र के साथ हर राज्य का अपना शुल्क है जिसे देना पड़ता है। वैसे लक्ष्यद्वीप में जाने के लिए परमिट तो लेना पड़ता है लेकिन इसके लिए किसी तरह का शुल्क नहीं देना पड़ता। वहीं अगर आप लद्दाख में जाते हैं तो 30 रूपये हर व्यक्ति के लिए देने पड़ते हैं। लेकिन अगर आप मणिपुर, नागालैंड या अरूणाचल प्रदेश में जाने के लिए कम से कम 100 रूपये का शुल्क देना पड़ता है।