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कर्ज माफी पर भाजपा सरकारों की ढाल बनें भागवत 

Wed, 28 Jun 2017 05:20 AM IST
संजय मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली 
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दिल्ली, किसान - फोटो : SELF
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कर्जमाफी पर संघ प्रमुख मोहन राव भागवत के बयान के बाद भाजपा शासित सरकारों ने राहत की सांस ली है। संघ प्रमुख का बयान किसान कर्जमाफी न कर पाने वाले राज्यों के लिए ढाल बनकर आया है। वरना यूपी से शुरू हुई कर्ज माफी की बयार पूरे देश में किसान आंदोलन की शक्ल लेकर भाजपा की मुश्किलें बढा रही थीं। महाराष्ट्र की देवेंद्र फण्डनवीश सरकार ने दबाव में आकर कर्ज माफी का फैसला उठाया है। तो जवाब में कांग्रेस की पंजाब और कर्नाटक की सरकारों ने कर्ज माफी का एलान कर दबाव भाजपा पर बढा दिया। 
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भाजपा शासित राज्यों में कर्ज माफी को लेकर किसान आंदोलन उग्र रूप होते दिखा। पार्टी शासित मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड सरीखे राज्यों में प्रदेश सरकारों पर किसान कर्ज माफी सरीखा कदम उठाने का दबाव है। उपर से लगातार हो रहे किसान आत्म हत्या के मामलों ने केंद्र सरकार पर भी मनोवैज्ञानिक दबाव बना दिया है। 

विपक्ष की ओर से केंद्र सरकार पर राजनैतिक दबाव बनाने के प्रयास जारी है। ऐसे हालातों में किसान कर्ज माफी पर भागवत के बयान ने भाजपा के लिए ढाल का कार्य किया है। केंद्र समेत पार्टी की कई राज्य सरकारें भागवत के बयान को संकेत मानते हुए अब राहत की सांस ले रही हैं। भागवत ने कहा है कि कर्ज माफी किसानों की समस्या का समाधान नहीं है। 
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किसान समस्या पर क्या है संघ की असल सोच 
संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान के बाद मामले पर अमर उजाला से बातचीत में भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महासचिव बद्री नारायण चौधरी ने कहा कि संघ ने कभी भी कर्ज माफी की मांग नहीं की है। चौधरी का कहना है कि किसानों को उस लायक बनाना चाहिए कि उसे कर्ज लेने की जरूरत ही न पडे। उन्होंने कहा कि कृषि को टीकाउ बनाना पडेगा। किसानों को उसके उत्पाद का उचित मूल्य मिलना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि लागत मूल्य से करीब 20 से 25 प्रतिशत ज्यादा दाम किसानों को उसके उत्पाद का मिलना चाहिए। चौधरी ने कहा कि किसानों की समस्या के लिए सरकार को एक विशेष सत्र बुलाना चाहिए। दरअसल किसानों के बीच भारतीय किसान संघ ही संघ की नुमाइंदगी करता है। 
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