भाजपा ने इस बार लोकसभा चुनाव 2019 में पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 90 ‘अल्पसंख्यक बहुल” जिलों में 50 प्रतिशत से अधिक सीटें जीती हैं। इन अल्पसंख्यक बहुल जिलों की पहचान 2008 में तत्कालीन संप्रग सरकार ने की थी। अल्पसंख्यक समुदाय की आबादी अधिक होने के साथ ही इन जिलों में सामाजिक-आर्थिक एवं मूलभूत सुविधाओं के संकेतक राष्ट्रीय औसत से कम हैं।
अल्पसंख्यक बहुल जिलों में भाजपा को सबसे अधिक लाभ पश्चिम बंगाल में मिला जहां 18 ऐसी सीटें हैं। उत्तर दिनाजपुर जिले के रायगंज में मुस्लिमों की आबादी 49 प्रतिशत है जहां भाजपा के देबश्री चौधरी को जीत मिली। वहीं मालदा में मालदा उत्तर सीट पर पार्टी के खगेन मुर्मु ने तृणमूल की मौसम नूर को 84,2888 मतों के अंतर से हराया। यहां 50 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है।
कूचबिहार सीट पर भाजपा के नीसिथ प्रमाणिक ने अपने करीबी प्रतिद्वंद्वी से बेहतर प्रदर्शन किया। इसके अलावा जलपाईगुड़ी, उत्तर दिनाजपुर जिले के बालुरघाट, बांकुरा में बिष्णुपुर लोकसभा सीट, हुगली सीट, वर्द्धमान-दुर्गापुर सीट पर भाजपा प्रत्याशियों ने जीत हासिल की।
संप्रग सरकार ने 2008 में एक विकास कार्यक्रम के तहत 90 अल्पसंख्यक बहुल जिलों की पहचान की थी जिसका मकसद इन जिलों में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कौशल विकास था। उत्तर प्रदेश में 20 लोकसभा सीटें ऐसी थीं जहां मुस्लिम मतदाताओं की खासी तादाद है।
वहीं बिहार में ऐसी सात सीट हैं। अररिया (45 प्रतिशत) में भाजपा के प्रदीप कुमार सिंह, कटिहार (40 प्रतिशत) में जदयू के दुलाल चंद्र गोस्वामी, दरभंगा (23 प्रतिशत) में भाजपा के गोपाल जी ठाकुर, खगड़िया में लोजपा के मौजूदा सांसद महबूब अली कैसर, बांका (20 प्रतिशत) में जदयू के गिरिधारी यादव और मधुबनी (19 प्रतिशत) में भाजपा के अशोक यादव ने जीत हासिल की।