पश्चिम बंगाल में बंगला पोक्खो ने ईस्टर्न रेलवे मुख्यालय में प्रदर्शन किया। संगठन ने आरोप लगाया कि टिकट काउंटर पर हिंदी बोलने पर मजबूर किया जाता है, आरपीएफ कर्मियों से यात्री परेशान होते हैं, बंगाली ठेले वालों का सामान जब्त किया जाता है और शौचालय में अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है।
पश्चिम बंगाल में रेलवे में भाषा और यात्री सुविधा को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को बंगला अधिकार समूह बांग्ला पोक्खो के सदस्य ईस्टर्न रेलवे मुख्यालय में एक प्रदर्शन करने के लिए इकट्ठा हुए। उनका कहना है कि हर रेलवे कर्मचारी को बंगाली बोलने वाले यात्रियों से उनकी मातृभाषा में बात करनी चाहिए और किसी को हिंदी बोलने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। बता दें कि यह प्रदर्शन 21 फरवरी को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस से एक दिन पहले आयोजित 'बांग्ला भाषा अधिकार सप्ताह' के तहत किया गया।
समूह के सदस्य आरोप लगाते हैं कि टिकट काउंटर पर कुछ हिंदी बोलने वाले कर्मचारी यात्रियों से बंगाली में बात करने से मना करते हैं और उन्हें हिंदी बोलने पर मजबूर करते हैं। संगठन के सचिव गार्गा चटर्जी ने कहा कि बंगाली यात्रियों को रेलवे पुलिस बल (आरपीएफ) के कुछ कर्मियों की तरफ से बार-बार परेशान किया जाता है और कभी-कभी उन्हें 'बांग्लादेशी' तक कह दिया जाता है।
बंगाली ठेले वालों के साथ दुर्व्यवहार का भी आरोप
इसके साथ ही समूह ने आरोप लगाया कि बंगाली ठेले वालों के साथ भी दुर्व्यवहार होता है और उनका सामान जब्त या फेंक दिया जाता है। समूह ने यह भी दावा किया कि कई रेलवे स्टेशनों, जैसे हावड़ा स्टेशन और सियालदह स्टेशन में शौचालय के लिए अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है। जो यात्री इन बढ़े हुए शुल्क का भुगतान करने से इनकार करते हैं, उन्हें धमकाया या मार-पीट का सामना करना पड़ता है।
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ईस्टर्न रेलवे अधिकारी ने दिया जवाब
हालांकि इस पूरे मामले में ईस्टर्न रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि अब तक किसी भी डिवीजन में यात्रियों के खिलाफ रेलवे या आरपीएफ कर्मचारियों के गलत व्यवहार की आधिकारिक शिकायत नहीं आई है। उन्होंने बताया कि आरपीएफ की तरफ से ठेले वालों के खिलाफ कार्रवाई केवल स्टेशन के कब्जे की वजह से की जाती है, न कि सभी ठेले वालों के खिलाफ। अधिकारी ने यह भी कहा कि कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों को नियमित रूप से संवेदनशील बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है।