पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद हुई हिंसा का मामला कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचा गया है। शुक्रवार को हाईकोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने राज्य के गृह सचिव से रिपोर्ट मांगी है। गृह सचिव को निर्देश दिया गया है कि वे रिपोर्ट पेश करें कि राज्य में कहां-कहां हिंसा की घटनाएं हुईं और क्या कदम उठाए गए। मामले की अगली सुनवाई 10 मई को होगी।
कलकत्ता उच्च न्यायालय की पांच न्यायाधीशों की पीठ ने एक जनहित याचिका का संज्ञान लिया था। कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि तीन दिन के अंदर वर्तमान कानून-व्यवस्था की स्थिति पर हलफनामा दायर करें। बता दें कि इस याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव बाद हिंसा के कारण बंगाल में लोगों का जीवन और उनकी स्वतंत्रता खतरे में है।
इस वजह से बड़ी बेंच कर रही है सुनवाई
पीठ ने राज्य के महाधिवक्ता किशोर दत्ता को निर्देश दिया कि हलफनामे में उन इलाकों का जिक्र करें, जहां हिंसा भड़की और यह भी बताएं कि उन पर नियंत्रण करने या रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाए गए। जनहित याचिका पर दस मई को होगी। शुरू में इस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने सुनवाई शुरू की और फिर दोपहर के अवकाश के बाद सुनवाई के लिए इसे बड़ी पीठ के समक्ष भेज दिया।
पश्चिम बंगाल में लोगों के जीवन और स्वाधीनता पर खतरे के मद्देनजर (जनहित याचिका के) महत्व को ध्यान में रखते हुए याचिका पर सुनवाई के लिए पांच न्यायाधीशों की बड़ी पीठ का गठन किया गया। याचिकाकर्ता अनिंद्य सुंदर दास ने याचिका में दावा किया कि राज्य पुलिस बल के कथित तौर पर कार्रवाई नहीं करने के कारण लोगों का जीवन खतरे में है।