कंचनजंगा एक्सप्रेस से मालगाड़ी टकराने में कुछ जिंदगियां रेलवे के एक परिचालन नियम के कारण बच गईं। हालांकि, इसी नियम के कारण दूसरे कुछ लोग मौत का शिकार बन गए। दरअसल, असम के लामडिंग रेलवे स्टेशन पर एक निर्धारित परिचालन प्रक्रिया के तहत अगरतला-सियालदह कंचनजंगा एक्सप्रेस के डिब्बों की दिशा बदल जाती है और डिब्बे विपरीत क्रम में हो जाते हैं।
इसी क्रम में सोमवार को जो डिब्बे पहले आगे थे, वे ट्रेन के पिछले हिस्से में आ गए। हादसे के ठीक पहले यह बदलाव पहले और आखिरी कोच में बैठे यात्रियों के लिए जीवन को बदलकर देने वाला साबित हुआ। इससे जहां पहले पीछे कोच में बैठे यात्री भाग्यशाली साबित हुए, वहीं पूर्व में पहले कोच में बैठे यात्रियों को हादसे की भयावहता झेलनी पड़ी, क्योंकि मालगाड़ी ने ट्रेन को पीछे से ही टक्कर मारी थी। इसके कारण नियमानुसार सबसे पीछे लगा गार्ड का डिब्बा, दो पार्सल वैन और उनके आगे लगा जनरल कोच सबसे प्रभावित हुए। इससे आगे के कोचों को नुकसान नहीं पहुंचा। जनरल डिब्बा अनारक्षित होता है और इसमें सामान्यत: भीड़ भी अधिक होती है। इसलिए सिर्फ एक डिब्बा प्रभावित होने के बावजूद मृतकों और घायलों की संख्या अधिक रही है। वहीं, हादसे के बाद अंतिम चार डिब्बों को छोड़कर बाकी डाउन कंचनजंगा एक्सप्रेस दोपहर 12:40 बजे 1,293 यात्रियों को लेकर कोलकाता की ओर रवाना हो गई। ट्रेन को अलुआबारी स्टेशन पर रोका गया और यहां यात्रियों के लिए पानी और भोजन उपलब्ध कराया गया। इस बीच, त्रिपुरा सरकार ने त्रिपुरा के लोगों की सहायता के लिए कंचनजंगा एक्सप्रेस दुर्घटना स्थल पर दो सदस्यीय टीम भेजी है।
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा के सचिव पीके चक्रवर्ती ने बताया कि दुर्घटना के बाद, त्रिपुरा राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) सक्रिय हो गया है। इसने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है और रेलवे अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। त्रिपुरा के लोगों की सहायता के लिए त्रिपुरा भवन कोलकाता से एक विशेष टीम दुर्घटनास्थल पर भेजी गई है। उन्होंने बताया कि अगर किसी त्रिपुरा निवासी की इसमें मौत हुई होगी तो राज्य सरकार पीड़ित के परिजनों को 2 लाख रुपये मुआवजा देगी। उन्होंने बताया कि हालांकि अभी तक किसी त्रिपुरा निवासी की मौत की खबर नहीं है।
दिल्ली-गुवाहाटी रूट पर कवच प्रस्तावित, पर लगा नहीं
कवच सिस्टम को लेकर रेलवे बोर्ड की अध्यक्ष और सीईओ जया वर्मा ने कहा कि दिल्ली-गुवाहाटी मार्ग पर कवच सिस्टम लगाने की योजना लंबे समय से प्रस्तावित है, लेकिन अभी काम शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने हादसे को लेकर कहा कि शुरुआती तौर पर यह मानवीय चूक लग रही है। हादसे की गहनता से जांच की जाएगी।
इन ट्रेनों का डायवर्ट हुआ रूट
कई ट्रेनों को न्यू जलपाईगुड़ी, सिलीगुड़ी जंक्शन, बागडोगरा और अलुआबारी रोड रूट से डायवर्ट किया गया है। इनमें 19602 न्यू जलपाईगुड़ी-उदयपुर सिटी साप्ताहिक एक्सप्रेस, 20503 डिब्रूगढ़-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस, 12423 डिब्रूगढ़-नई दिल्ली राजधानी, 01666 अगरतला-रानी कमलापति स्पेशल ट्रेन, 12377 सियालदह-न्यू अलीपुरद्वार पदातिक, 06105 नागरकोइल जं.-डिब्रूगढ़ स्पेशल, 20506 नई दिल्ली-डिब्रूगढ़ राजधानी, 12424 नई दिल्ली-डिब्रूगढ़ राजधानी, 22301 हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी वंदे भारत, 12346 गुवाहाटी-हावड़ा सरायघाट, 12505 कामाख्या-आनंद विहार नॉर्थईस्ट, 12510 गुवाहाटी-बेंगलुरु एक्सप्रेस, 22302 न्यू जलपाईगुड़ी-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस, 15620 कामाख्या-गया, 15962 डिब्रूगढ़-हावड़ा कामरूप, 15636 गुवाहाटी-ओखा एक्सप्रेस, 15930 न्यू तिनसुकिया-ताम्बरम एक्सप्रेस, 13148 बामनहाट-सियालदह उत्तर बंगा एक्सप्रेस, और 22504 डिब्रूगढ़-कन्याकुमारी एक्सप्रेस शामिल हैं।