पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य की सियासत में गर्माहट तेज है। इसका एक कारण चुनावी रण में राजनीतिक पार्टियों की तेज होती तैयारी है, तो दूसरा बड़ा कारण चुनाव आयोग की तरफ से राज्य में कराए जा रहा मतदाता सूची का विशेष गहण पुनरीक्षण (एसआईआर) है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और राज्य में ममता सरकार बनाम चुनाव आयोग के बीच बढ़ते विवाद को देखते हुए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार अग्रवाल ने अंतिम मतदाता सूची को लेकर अपना रुख साफ किया है।
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पहले 14 फरवरी को जारी होनी थी सूची
गौरतलब है कि पहले अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को जारी होनी थी, लेकिन दावों और आपत्तियों की जांच के लिए अधिक समय देने के कारण तारीख बढ़ाकर 28 फरवरी कर दी गई थी। इसी बीच शुक्रवार को सीईओ ने अतिरिक्त सीईओ, संयुक्त सीईओ, उप-सीईओ और विशेष रोल पर्यवेक्षकों के साथ एक वर्चुअल बैठक की। इस बैठक में सभी जिलाधिकारियों (जो जिला निर्वाचन अधिकारी भी होते हैं) से पुनरीक्षण कार्य की प्रगति की जानकारी ली गई।
बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि दस्तावेजों की जांच और आपत्तियों के निपटारे का काम तेज किया जाए। सीईओ ने साफ कहा कि किसी भी तरह की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कुछ जिलों के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें जांच पूरी करने के लिए 4-5 दिन अतिरिक्त लग सकते हैं। पहले 21 फरवरी को जांच प्रक्रिया पूरी करने की अंतिम तारीख तय की गई थी।