कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ से हुई मौतौं के बाद सरकार ने पूजा समितियों को भीड़ संभालने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की हिदायत दी है। उत्तर कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार शाम बारिश के बीच अचानक भीड़ बढ़ने से भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई और भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई थी।
हादसे के बाद मंत्री की अपील
पश्चिम बंगाल के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने रविवार को दुर्गा पूजा समितियों से अपील की कि वे भीड़ को नियंत्रित करने के साथ-साथ लोगों की आवाजाही का भी पूरा ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आयोजकों को पहले से ही जरूरी इंतजाम करने होंगे, ताकि किसी भी स्थिति में भगदड़ जैसी नौबत न आए।
बारिश के बीच उमड़ी भीड़ बनी हादसे की वजह?
दिलीप घोष के मुताबिक, चोरबागान में हुआ हादसा अचानक बड़ी संख्या में लोगों के जुटने और भीड़ के दबाव के कारण हुआ होगा। शनिवार शाम बारिश के बीच पंडाल में लोगों की भीड़ बढ़ गई और हालात बिगड़ गए। इस घटना में 19 लोगों की जान चली गई, जबकि 25 अन्य घायल हो गए।
'पहले कभी नहीं हुआ ऐसा हादसा'
दिलीप घोष ने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि चोरबागान में जो हुआ, वह बेहद पीड़ादायक है। लोग वर्षों से दुर्गा पूजा पंडालों में दर्शन करने आते रहे हैं, लेकिन पहले इस तरह की घटना सामने नहीं आई थी। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा जैसे बड़े आयोजनों में लाखों लोगों की भीड़ जुटती है और ऐसे में किसी की जान जाना बेहद दुखद है। इस तरह की त्रासदी को हर हाल में रोकना जरूरी है।
पुलिस के साथ मिलकर बनानी होगी भीड़ संभालने की योजना
मंत्री ने साफ कहा कि दुर्गा पूजा समितियों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। आयोजकों को पुलिस के साथ मिलकर ऐसे इंतजाम करने चाहिए, जिनसे पंडाल में आने और बाहर निकलने वाले लोगों की आवाजाही सुचारु बनी रहे। भीड़ को एक ही जगह जमा होने से रोकना और लोगों के निकलने के रास्ते खुले रखना बेहद जरूरी है। समय रहते सावधानी बरतने से ऐसे हादसों की आशंका कम की जा सकती है।
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घायलों के इलाज का भरोसा
दिलीप घोष ने कहा कि राज्य सरकार हादसे में घायल हुए लोगों को उचित इलाज मुहैया कराने के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है। हालांकि, 19 लोगों की मौत और 25 लोगों के घायल होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बड़े आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से पर्याप्त तैयारी की गई थी? हादसे के बाद पूजा समितियों को सतर्क रहने की सलाह देना जरूरी है, लेकिन ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समय रहते ठोस कदम उठाना भी उतना ही अहम है।