पश्चिम बंगाल में ब्लड और प्लाज्मा के कथित गैर-कानूनी अंतरराज्यीय कारोबार के आरोपों के बाद राज्य स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। तय नियमों का उल्लंघन कर दूसरे राज्यों में बड़े पैमाने पर ब्लड और प्लाज़्मा भेजे जाने की आशंका के बीच विभाग की टीमों ने राज्य के कई निजी ब्लड बैंकों पर छापेमारी की है। इस पूरे मामले की जांच तेज कर दी गई है और सात निजी ब्लड बैंक जांच के दायरे में हैं।
क्या छापेमारी में सामने आईं शुरुआती गड़बड़ियां?
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने कथित अनियमितताओं की जांच के तहत हावड़ा और पूर्व बर्धमान जिलों के निजी ब्लड बैंकों में तलाशी अभियान चलाया। अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि हावड़ा के एक निजी ब्लड बैंक से आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किए बिना करीब 10,000 यूनिट ब्लड और प्लाज़्मा दूसरे राज्यों में भेजा गया हो सकता है।
जांच के दौरान किन दस्तावेजों की पड़ताल हुई?
छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने ब्लड बैंक के रजिस्टर, ब्लड कलेक्शन और वितरण से जुड़े रिकॉर्ड सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की गहन जांच की। जांच के लिए कई रिकॉर्ड जब्त भी किए गए हैं, ताकि पूरे नेटवर्क और लेन-देन की पड़ताल की जा सके।
पूर्व बर्धमान के ब्लड बैंक पर क्यों बढ़ा शक?
पूर्व बर्धमान जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-19 स्थित एक निजी ब्लड बैंक में भी इसी तरह की जांच की गई। जांचकर्ताओं को संदेह है कि इस ब्लड बैंक ने स्थानीय आवश्यकता से कहीं अधिक रक्तदान शिविर आयोजित किए और वहां एकत्र किए गए ब्लड को बाद में राज्य के बाहर भेज दिया।
क्या अंतरराज्यीय ब्लड ट्रांसफर के नियमों का पालन हुआ था?
राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि छापेमारी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित ब्लड बैंकों ने ब्लड और ब्लड कंपोनेंट्स के अंतरराज्यीय परिवहन से जुड़े सभी कानूनी दिशा-निर्देशों का पालन किया था या नहीं। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में कुछ अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। सभी संबंधित रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। जांच फिलहाल अहम चरण में है और यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।"
क्या बिना मंजूरी भेजा गया ब्लड और प्लाज्मा?
अधिकारी ने बताया कि विभाग यह भी जांच कर रहा है कि पश्चिम बंगाल से बाहर ब्लड या प्लाज़्मा भेजने से पहले आवश्यक मंजूरियां ली गई थीं या नहीं। उन्होंने कहा कि मौजूदा नियमों के अनुसार, किसी भी राज्य से दूसरे राज्य में बड़ी मात्रा में ब्लड या प्लाज़्मा भेजने के लिए स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल और नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल, दोनों की पूर्व लिखित अनुमति अनिवार्य होती है। हम यह पता लगा रहे हैं कि हर मामले में इन नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
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कितने ब्लड बैंक जांच के दायरे में हैं?
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, फिलहाल राज्यभर के सात निजी ब्लड बैंक जांच के घेरे में हैं। विभाग का कहना है कि सभी मामलों की अलग-अलग और विस्तृत जांच की जा रही है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने कुछ दिन पहले ही इन आरोपों की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया था। अधिकारियों को आशंका है कि कथित गैर-कानूनी कारोबार के पीछे पश्चिम बंगाल और दूसरे राज्यों में सक्रिय प्रभावशाली लोगों या समूहों का एक संगठित नेटवर्क हो सकता है। एक अधिकारी ने कहा कि विशेष समिति ने अपना काम शुरू कर दिया है। आरोपों के हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है, जिसमें किसी संगठित नेटवर्क की संभावित संलिप्तता भी शामिल है। फिलहाल जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।