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बंगाल की बेटी को मिलेगा इंसाफ: 13 साल पुराने कामदुनी केस की खुलेगी फाइल, CM के जनता दरबार पहुंचा पीड़ित परिवार

Wed, 15 Jul 2026 02:05 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, कोलकाता

सार

कामदुनी मामले में पीड़िता का परिवार मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के जनता दरबार पहुंचा। भाजपा ने 13 साल पुराने मामले की फाइल दोबारा खोलने की बात कही है। परिवार का आरोप है कि जांच और अदालत में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण तथ्यों को सही ढंग से पेश नहीं किया।
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शुभेंदु अधिकारी, पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कामदुनी दुष्कर्म-हत्या पीड़िता के परिवार के सदस्य बुधवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के 'जनता दरबार' कार्यक्रम में शामिल हुए। कुछ दिन पहले ही राज्य के भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने 13 साल पहले हुए अपराध की फाइलों को फिर से खोलने की बात कही। 

अधिकारी ने क्या बताया? 

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2013 की कामदुनी घटना के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के दो प्रमुख चेहरे, तुम्पा कोयल और मौसमी कोयल, मुख्यमंत्री के साथ हुई मुलाकात के दौरान पीड़ित के परिवार के सदस्यों के साथ थे। राज्य सरकार के एक अधिकारी ने कहा, 'जनता दरबार के दौरान प्राप्त अभ्यावेदनों पर उचित प्रशासनिक चैनलों के माध्यम से कार्रवाई की जाएगी।'

पहला जनता दरबार कब आयोजित किया गया था?
अधिकारी विभिन्न मुद्दों पर लोगों की शिकायतें सुनने और अधिकारियों को उनका तुरंत निवारण करने के निर्देश देने के लिए अपना 'जनता दरबार' आयोजित करते आ रहे हैं। इस तरह का पहला साप्ताहिक कार्यक्रम 18 मई को आयोजित किया गया था। मुख्यमंत्री का पदभार संभालने के बाद अधिकारी ने इस पहल की घोषणा करते हुए कहा था कि नागरिक हर सप्ताह उनसे सीधे मिल सकेंगे।

क्या है पूरा मामला?

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2013 में, उत्तरी 24 परगना के कामदुनी में घर लौट रही एक कॉलेज छात्रा को एक खेत में घसीटकर ले जाया गया।  उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। इसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। उसका क्षत-विक्षत शव अगली सुबह मिला। इस घटना ने राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंताओं के बीच व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया था।

कोर्ट ने क्या सजा सुनाई?
तीन साल बाद, एक सत्र न्यायालय ने इस मामले में तीन आरोपियों को मौत की सजा और तीन अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने दो आरोपियों की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया और तीसरे दोषी को बरी कर दिया। इसने तीन अन्य दोषियों की आजीवन कारावास की सजा को कम कर दिया था।

टीएमसी पर क्या आरोप लगाया?
अधिकारी ने आरोप लगाया था कि पूर्व टीएमसी सरकार सुप्रीम कोर्ट में न्याय की मांग कर रही कामदुनी बलात्कार और हत्या पीड़िता के परिवार का विरोध कर रही थी। उन्होंने कहा था कि उनका प्रशासन उन्हें कानूनी सहायता प्रदान करके मदद का हाथ बढ़ाएगा।

पीड़ित परिवार ने न्याय न मिलने की शिकायत करते हुए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि राज्य ने अदालतों के समक्ष महत्वपूर्ण तथ्य प्रस्तुत नहीं किए और पुलिस ने अपराध की ठीक से जांच नहीं की। कामदुनी घटना के बाद, तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उस स्थान का दौरा किया था और उन्हें स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रदर्शनकारियों में माओवादी भी शामिल थे, इस टिप्पणी की कड़ी आलोचना हुई थी।

 

 

 

 

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