पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले निर्वाचन आयोग (ईसी) ने निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। आयोग ने पूर्व बर्धमान जिले के खंडघोष ब्लॉक की जॉइंट बीडीओ और असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर (एआरओ) ज्योत्सना खातून को निलंबित कर दिया है। उन पर ड्यूटी के दौरान सत्ताधारी टीएमसी के पक्ष में प्रचार करने का गंभीर आरोप है।
आयोग ने यह भी पाया कि चुनावों की घोषणा से पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने 832 ऐसे लोगों को सुरक्षा देने के लिए 2,185 पुलिसकर्मियों को तैनात किया था, जो सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस से जुड़े थे। इसके साथ ही, 144 अन्य लोगों को भी सुरक्षा दी गई थी, जिनमें सत्ताधारी दल के समर्थक शामिल थे।सूत्रों ने बताया कि आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और पुलिस महानिदेशक सिद्ध नाथ गुप्ता को निर्देश दिया है कि वे अगले दो से तीन दिनों के भीतर निष्पक्ष और न्यायसंगत तरीके से एक सख्त पेशेवर समीक्षा करें।
इससे पहले दिन में आयोग ने पश्चिम बंगाल पुलिस से एक स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। यह रिपोर्ट आयोग के उस पिछले आदेश के पालन के संबंध में थी, जिसमें आपराधिक रिकॉर्ड वाले और दागदार छवि वाले राजनीतिक नेताओं से, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों, राज्य द्वारा दी गई सुरक्षा वापस लेने का निर्देश दिया गया था।
इससे पहले, आयोग ने नेताओं को राज्य की ओर से दी गई सुरक्षा हटाने का निर्देश दिया था, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों। इसमें वे नेता भी शामिल थे जो जमानत या पैरोल पर बाहर हैं, जिन पर आपराधिक मामले चल रहे हैं, या जिनका आपराधिक इतिहास रहा है।