पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से पहले भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी पर भवानीपुर में फर्जी वोटिंग की साजिश का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि एक टीएमसी पार्षद ने 700 से ज्यादा 'नकली उंगलियां' खरीदी हैं। उन्होंने चुनाव आयोग को इसका नमूना भी सौंपा है। वहीं, टीएमसी प्रवक्ता ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। आइए, विस्तार से पूरे विवाद को समझते हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से पहले एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। भवानीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीट पर अब 'नकली उंगलियों' का जिक्र हो रहा है। भाजपा के बड़े नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर फर्जी वोटिंग कराने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। यह आरोप इतना बड़ा है कि इससे पूरे राज्य की राजनीति में खलबली मच गई है। भवानीपुर इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां से मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी खुद मैदान में हैं और उनके खिलाफ भाजपा के शुभेंदु अधिकारी चुनाव लड़ रहे हैं।
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मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में अधिकारी ने कहा कि टीएमसी के पार्षद ने भवानीपुर में फर्जी वोटिंग कराने के लिए सैकड़ों 'नकली उंगलियां' खरीदी हैं। उनका दावा है कि ऐसी 700 से ज्यादा नकली उंगलियों का इंतजाम किया गया है ताकि चुनाव में गड़बड़ी की जा सके। यह खबर इसलिए भी ज्यादा चर्चा में है क्योंकि दूसरे चरण का मतदान ठीक एक दिन बाद ही होना है। शुभेंदु अधिकारी ने साफ चेतावनी दी है कि वह चुनाव में किसी भी तरह की धांधली को बर्दाश्त नहीं करेंगे और न ही ऐसा होने देंगे।
भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि टीएमसी चुनाव को प्रभावित करने के लिए 700 से अधिक 'नकली उंगलियों' का इस्तेमाल कर सकती है।
उन्होंने चुनाव आयोग को अपने दावे की पुष्टि के लिए नकली उंगली का एक 'नमूना' (सैंपल) भी सौंप दिया है।
अधिकारी ने बताया कि भवानीपुर में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा बांटी गई 3,810 बूथ पर्चियां बिना बंटे ही वापस आ गई हैं।
उन्होंने कहा कि जिन वोटरों को पर्चियां नहीं मिली हैं, उनकी सूची को विशेष रूप से चिह्नित कर लिया गया है ताकि फर्जीवाड़ा न हो।
उनका मानना है कि भवानीपुर की जनता अब बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार है और वह अपने वोटों के जरिए इसका करारा जवाब देगी।
'नकली उंगलियों' के गंभीर आरोपों पर टीएमसी ने क्या कहा है?
भाजपा के इन गंभीर आरोपों पर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इन्हें सिरे से खारिज कर दिया है।
टीएमसी के प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा है कि ये आरोप पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत हैं।
उन्होंने सवाल किया कि क्या दुनिया के किसी भी लोकतंत्र में इस तरह की घटना कभी संभव है?
टीएमसी प्रवक्ता का कहना है कि ऐसी चीजें न तो संभव हैं और न ही कभी व्यवहार में लाई जाती हैं।
उनका स्पष्ट कहना है कि भाजपा के इन झूठे आरोपों का जवाब देने का कोई मतलब नहीं बनता है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की क्या हैं तारीखें?
पश्चिम बंगाल में 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव कई चरणों में पूरे कराए जा रहे हैं।
राज्य में विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।
अब दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना तय है, जिसमें भवानीपुर जैसी अहम और वीआईपी सीट भी शामिल है।
मतदान के बाद चुनाव के अंतिम नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
इसी दिन यह साफ हो जाएगा कि राज्य में अगली सरकार किस पार्टी की बनने जा रही है।
भावनीपुर में कौन आमने-सामने?
भवानीपुर विधानसभा सीट पर मुकाबला बेहद कड़ा और दिलचस्प हो गया है। एक तरफ राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं, तो दूसरी तरफ कभी उनके बेहद खास रहे और अब भाजपा के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी हैं। दोनों ही पार्टियां इस सीट को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं। 'नकली उंगलियों' का यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब चुनाव प्रचार अपने चरम पर है। अधिकारी का यह दावा अगर सच साबित होता है, तो यह चुनाव आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। हालांकि, बिना ठोस जांच के इसे सिर्फ एक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा ही माना जा रहा है।
मामले पर चुनाव आयोग ने नहीं की कोई टिप्पणी
फिलहाल, चुनाव आयोग ने इस मामले पर आधिकारिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन अधिकारी द्वारा सौंपे गए नमूने की जांच जरूर हो सकती है। लोकतंत्र में हर वोट की कीमत होती है और स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। पश्चिम बंगाल की जनता इस बार किस पर भरोसा जताती है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन एक बात साफ है कि आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर ने चुनाव के माहौल को और भी ज्यादा गर्म कर दिया है। अब सभी की निगाहें 29 अप्रैल को होने वाले मतदान पर टिकी हैं।