पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को एक बार फिर चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा। राज्य में एसआईआर अभ्यास के तहत मतदाताओं की दूसरी पूरक सूची जारी होने के दिन मुख्यमंत्री मतदाताओं की पहली पूरक सूची सार्वजनिक न करने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया।उन्होंने कहा, लोग जल्द ही इस तरह के मनमाने फैसलों पर जवाब मांगेंगे। कोलकाता हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, भगवान की चक्की धीमी चलती है। लेकिन चलती पक्की है। मैं यह बात राम नवमी के दिन कह रही हूं। लोग इसका जवाब देंगे।
विचाराधीन नामों की पहली पूरक सूची 23 मार्च को ऑनलाइन जारी की गई थी। लेकिन इसमें हटाए और जोड़े गए नामों की संख्या आधिकारिक तौर पर नहीं बताई गई। हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने दावा किया कि अब तक जांच की गई 32 मतदाताओं में से करीब 40 फीसदी को सूची से हटा दिया गया है। यानी करीब 13 लाख अतिरिक्त नाम हटाए गए हैं, जिससे कुल हटाए गए मतदाताओं की संख्या करीब 76 लाख हो गई है।
राज्य में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) 7.6 करोड़ से अधिक मतदाताओं के साथ हुआ था, जिनमें से अब तक करीब 10 फीसदी नाम हटाए जा चुके हैं और वर्तमान संख्या लगभग 6.8 करोड़ रह गई है।
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बनर्जी ने कहा, अब जो हो रहा है, वो सुपर हिटलर के कारनामों को भी पीछे छोड़ देगा। यह पूरी कवायद (एसआईआर अभ्यास) भाजपा की गायब करने वाली मशीन बन गई है। ये लोग लोकतंत्र और जनता के अधिकारों को नष्ट कर रहे हैं। मुझे इनसे नफरत है और शर्म आती है। इन्होंने एक सदस्य को (सूची में) रखा है और उसी परिवार के बाकी चार सदस्यों को हटा दिया है। इन्होंने एक खास समुदाय से जुड़े लाखों नाम हटा दिए हैं। क्या भाजपा खुद को इस देश का जमींदार समझती है?
पूरक सूचियों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग की पहली पूरक सूची को पूरी तरह प्रकाशित करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा, हमें अभी तक पहली पूरक सूची नहीं मिली है। यह अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। लोकतंत्र की इससे बड़ी हत्या और कोई नहीं हो सकती। मतदाता सूची कब प्रकाशित होनी थी? सुप्रीम कोर्ट ने फैसला कब सुनाया? पिछली सूची 28 को प्रकाशित हुई थी। मैंने सुना है कि उन्होंने उस सूची से करीब 50 फीसदी मतदाताओं के नाम हटा दिए हैं।