पश्चिम बंगाल सीआईडी के एक अधिकारी ने बताया कि हमने बागजोला नहर में सांसद के शरीर के अंगों को खोजने की कोशिश की। हमारे अधिकारियों की एक और टीम बनगांव गई है, जहां आरोपियों ने शरीर के कुछ हिस्सों को फेंकने की बात स्वीकार की है। हमें संदेह है कि खोपड़ी को ठिकाने लगाने के लिए एक ट्रॉली बैग का इस्तेमाल किया गया था।
पश्चिम बंगाल सीआईडी सोमवार को बांग्लादेश सीमा के निकट बनगांव इलाके में पहुंची। जहां पर टीम ने उस ट्रॉली बैग की तलाश की, जिसमें बांग्लादेशी सांसद अनवारुल अजीम अनार की खोपड़ी को ठिकाने लगाने का संदेह है। इस दौरान सीआईडी ने अनार की हत्या में इस्तेमाल औजारों और शरीर के हिस्सों का बगजोला नहर में पता लगाने के लिए भारतीय नौसेना की भी मदद ली।
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एक अधिकारी ने बताया कि हम सांसद के शरीर के अंगों को खोजने की कोशिश कर रहे हैं। हमने बागजोला नहर में एक और दौर की खोज की कोशिश की। हमने भारतीय नौसेना की मदद ली। हमारे अधिकारियों की एक और टीम बनगांव गई है, जहां आरोपियों ने शरीर के कुछ हिस्सों को फेंकने की बात स्वीकार की है। हमें संदेह है कि खोपड़ी को ठिकाने लगाने के लिए एक ट्रॉली बैग का इस्तेमाल किया गया था।
बागुईहाटी इलाके में कंकालों से भरा बैग बरामद
इस बीच, पुलिस ने सोमवार दोपहर को विधाननगर पुलिस आयुक्तालय के अंतर्गत बागुईहाटी इलाके में एक सुनसान इमारत से कंकालों से भरा एक बैग बरामद किया। अधिकारी ने बताया कि हमने विधाननगर पुलिस से संपर्क किया है। कंकालों को हमारे साथ साझा करने का अनुरोध किया है। हड्डियां उस इलाके से बरामद की गईं, जहां बांग्लादेशी सांसद रह रहे थे। हम उन पर कुछ परीक्षण करना चाहते हैं।
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मांस के टुकड़े का डीएनए परीक्षण कराने की योजना बना रही पुलिस
हालांकि, पुलिस ने इससे पहले न्यू टाउन फ्लैट के सेप्टिक टैंक से मांस के टुकड़े बरामद किए थे, जहां अनार को आखिरी बार देखा गया था। अधिकारी ने बताया कि वह नमूने का डीएनए परीक्षण कराने और सांसद की बेटी से मिलाने की योजना बना रहे हैं, जिसके जल्द ही कोलकाता पहुंचने की संभावना है।
12 मई को कोलकाता पहुंचे थे अनावरुल
बता दें कि 18 मई को कोलकाता के बारानगर निवासी और बांग्लादेशी सांसद अनावरुल अजीम अनार के परिचित गोपाल विश्वास ने अनाज के लापता होने की पुलिस को शिकायत दी थी। विश्वास द्वारा पुलिस को दी शिकायत के अनुसार, अनार 12 मई को कोलकाता पहुंचे थे और विश्वास के घर रुके। 13 मई की दोपहर सांसद बारानगर आवास से डॉक्टर को दिखाने के लिए निकले थे। उन्होंने विश्वास से रात के खाने पर घर वापस आने की बात कही, लेकिन वह नहीं लौटे। 17 मई तक भी जब सांसद से विश्वास का संपर्क नहीं हो पाया तो उन्हें एक दिन बाद गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करानी पड़ी।