पश्चिम बंगाल भाजपा ने अक्टूबर में होने वाले विधानसभा उपचुनाव और आगामी नगर निकाय चुनाव से पहले अपनी मीडिया टीम में बदलाव किया है। पार्टी ने पूर्व प्रदेश महासचिव सायंतन बोस और पार्टी नेता प्रणय रॉय को फिर से प्रवक्ता बनाया है। दोनों नेता मीडिया में पार्टी का पक्ष रखने के लिए जाने जाते हैं। पार्टी के भीतर इसे चुनावी मुकाबलों से पहले राजनीतिक संदेश को और धार देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। यह बदलाव भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे से ठीक पहले हुआ है।
भाजपा ने मीडिया टीम में कौन-कौन से बदलाव किए?
पार्टी ने अधिवक्ता डेबजीत सरकार को प्रदेश इकाई का मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया है। अनुपम घोष को मीडिया विभाग का संयोजक बनाया गया है। प्रवक्ताओं की नई सूची में रितेश तिवारी, सायंतन बोस, केया घोष, प्रणय रॉय, डॉ. तन्मय मुखोपाध्याय, सप्तर्षि चौधरी, ओफेलिया सिंह, अंकन दत्ता, मेघा सेन रॉय, डॉ. निखिल प्रसून सिंह, शमिक दासगुप्ता, सुदीप्ता गुहा और सेवानिवृत्त मेजर ऋत्विक पाल शामिल हैं। सप्तर्षि चौधरी को पार्टी के प्रकाशनों की जिम्मेदारी भी दी गई है। पार्टी के इस फेरबदल में मीडिया विभाग के संयुक्त संयोजक के तौर पर पार्थ सारथी चौधरी और चंद्रशेखर बसुतिया को जिम्मेदारी मिली है।
आईटी और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी किसे मिली?
भाजपा ने मीडिया टीम के साथ डिजिटल मोर्चे पर भी जिम्मेदारियां तय की हैं। जॉय मलिक को आईटी सेल का प्रमुख बनाया गया है, जबकि उपमन्यु भट्टाचार्य सोशल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगे। पार्टी के संगठन में मीडिया, आईटी और सोशल मीडिया को अलग-अलग जिम्मेदारियां देकर चुनावी समय में संदेश को तेजी से आगे पहुंचाने की तैयारी की गई है। सायंतन बोस और प्रणय रॉय की वापसी को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि दोनों पहले नियमित रूप से मीडिया में पार्टी का पक्ष रखते रहे हैं।
नितिन नबीन के दौरे से पहले बदलाव क्यों अहम है?
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन 15 सितंबर से पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। उनके दौरे के दौरान राज्य की राजनीतिक स्थिति और विधानसभा उपचुनाव तथा नगर निकाय चुनाव की तैयारियों की समीक्षा की उम्मीद है। यह दौरा पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सामिक भट्टाचार्य के नेतृत्व में संगठन की स्थिति का पहला बड़ा आकलन भी माना जा रहा है। भट्टाचार्य करीब एक साल से प्रदेश इकाई की कमान संभाल रहे हैं। उनके नेतृत्व में संगठन को चुनावी मुकाबलों के लिए तैयार करने की प्रक्रिया अब तेज होती दिख रही है।
प्रदेश संगठन में पहले भी हो चुका है बड़ा बदलाव?
मीडिया टीम में फेरबदल से पहले भाजपा ने पिछले सप्ताह प्रदेश कार्यकारिणी का भी विस्तार किया था। इसमें वरिष्ठ नेताओं को संगठन में अहम जिम्मेदारियां दी गई थीं। इनमें मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार, जगन्नाथ चटर्जी, तापस रॉय, अग्निमित्रा पॉल और शंकर घोष जैसे नेताओं को प्रमुख संगठनात्मक जिम्मेदारियां मिली थीं। सामिक भट्टाचार्य के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद करीब एक साल तक नई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन लंबित था। अब प्रदेश कार्यकारिणी और मीडिया टीम में बदलाव के जरिए संगठन को नए सिरे से व्यवस्थित करने की कोशिश की जा रही है।
अब भाजपा के सामने क्या चुनौती है?
भाजपा के लिए ये संगठनात्मक बदलाव ऐसे समय हुए हैं, जब पार्टी के सामने लगातार चुनावी मुकाबले हैं। छह अक्तूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं और इसके बाद नगर निकाय चुनाव होंगे। इन चुनावों में भाजपा के सामने विधानसभा चुनाव में मिली राजनीतिक बढ़त को बनाए रखने और उसे जमीनी संगठन में बदलने की चुनौती है। इनपुट के मुताबिक भाजपा ने मई में हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को हराकर पश्चिम बंगाल में सरकार बनाई है। अब पार्टी के लिए उपचुनाव तत्काल अग्निपरीक्षा हैं। ऐसे में अनुभवी नेताओं को मीडिया के मोर्चे पर वापस लाना और आईटी तथा सोशल मीडिया की जिम्मेदारियां तय करना चुनावी संदेश को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।