मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी पर कार्रवाई से पार्टी नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पहले तो खुद ममता ने आयोग के फैसले को असांविधानिक बताते हुए धरना देने का एलान कर दिया। उसके बाद पार्टी के अन्य नेताओं ने भी आयोग को जमकर कोसा। टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन ने कहा, यह हमारे लोकतंत्र के लिए काला दिन है। आयोग का रवैया एकतरफा है।
टीएमसी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष यशवंत सिन्हा ने कहा सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं से समझौता किया गया है। हमें चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर हमेशा से संदेह था, लेकिन इसने जो भी दिखावा किया आज सब सामने आ गया। सिन्हा ने कहा कि अब यह साफ हो गया है कि आयोग मोदी के निर्देश पर काम कर रहा है।
पार्टी के एक अन्य अन्य नेता कुणाल घोष ने कहा कि ममता के चुनाव प्रचार पर 24 घंटे का प्रतिबंध अत्याचार और तानाशाही की हनक है। इस बीच डेरेक ओब्रायन के नेतृत्व में टीएमसी का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को चुनाव अधिकारियों से मिलकर सीतलकुची की घटना पर भाजपा नेताओं की टिप्पणी की शिकायत की। पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में होने वाले चुनाव के चार चरण पूरे हो चुके हैं और शेष चार चरण के मतदान 17 से 29 अप्रैल तक होंगे।