फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खबर का असरः BEL चेयरमैन बोले, आकाश मिसाइल के लिए नहीं बनाएंगे प्रेशराइज्ड गैस कंटेनर

Sat, 08 Feb 2020 01:32 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, लखनऊ से लौटकर

सार

  • पीएमसी को माना बीडीएल, बीईएल के नाक की लड़ाई
  • सीएमडी ने माना कि बीईएल का कंटेनर अच्छा लेकिन भारी, यूजर फ्रेंडली भी नहीं
विज्ञापन
Akash Missile - फोटो : AmarUjala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सार्वजनिक क्षेत्र की दो कंपनियों भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) और भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड (बीईएल) में आकाश मिसाइल प्रणाली को लेकर चल रही नाक की लड़ाई खत्म होने वाली है। बीईएल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर एमवी गौतमा ने माना कि बीडीएल प्रेशराइज्ड मिसाइल कंटेनर डेवलप नहीं कर पा रही थी।

विज्ञापन

इसलिए बीईएल ने इसे विकसित किया था। गौतमा ने माना कि बीईएल का प्रेशराइज्ड मिसाइल कंटेनर अच्छा है। इसमें 50 साल तक कोई लीकेज आने की संभावना नहीं है, लेकिन वजन में भारी और यूजर फ्रेंडली के मामले में कमजोर है।

 

इस मामले में बीडीएल के सीएमडी कमोडोर (रिटा.) सिद्धार्थ मिश्रा ने कहा कि बीडीएल ने सफलता पूर्व प्रेशराइज्ड मिसाइल कंटेनर विकसित किया है। हम भारतीय सेना को पीएमसी में ही आकाश मिसाइल दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी योजना बीडीएल को एक नई ऊंचाई देने में लगी है।

कोई राकेट साइंस तो है नहीं, हम इसमें क्यों पड़ें

एमवी गौतमा ने स्वीकार किया कि बीडीएल का कंटेनल बीईएल से हल्का, यूजर फ्रेंडली है। मिसाइल के ट्रांसपोर्टेशन में बीईएल के कंटेनर से अधिक उपयुक्त है। हालांकि लीकेज के मामले में वह बीईएल के कंटेनर जैसी गारंटी नहीं दे सकता। गौतमा ने कहा कि हम इस झमेले में नहीं पड़ना चाहते थे। आकाश के लिए कंटेनर की आपूर्ति का काम बीडीएल का था। वह नहीं कर पा रहा था।

उसने जो कंटेनर तैयार करके आठ स्क्वाड्रन आकाश की आपूर्ति में दिया था, उसमें लीकेज की शिकायत थी। इसलिए बीईएल ने प्रेशराइज्ड मिसाइल कंटेनर तैयार किया था। हीलियम लीक टेस्टिंग में यह सफल है।  गौतमा ने कहा कि यह कोई रॉकेट साइंस तो है नहीं। बीईएल कंटेनर की आपूर्ति मामले में अपने कदम पीछे खींच लेगी।

क्या है मामला

डीआरडीओ ने आकाश मिसाइल प्रणाली विकसित की है। इसे भारतीय सेना में शामिल किया जा चुका है। हाल में वायुसेना ने भी अपने बेड़े में सात स्क्वाड्रान आकाश मिसाइल प्रणाली को शामिल करने का निर्णय ले लिया है। आकाश मिसाइल आम तौर पर वातानुकूलित स्टोरेज में रखी जाती है। लेकिन लड़ाई के मैदान में ले जाने के लिए इसे कंटेनर में ले जाया जाता है।

विज्ञापन


विश्व के बड़े देशों की मिसाइल प्रेशराइज्ड कंटेनर में ही जाती है। ताकि मिसाइल को वातारण की नमी समेत अन्य कारक प्रभावित न कर सके। इस मिसाइल प्रणाली के लिए कंटेनर आदि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी बीडीएल की है। बीडीएल सेना को नाइट्रोजन गैस प्रेशराइज्ड कंटेनर में दे रही है। वायुसेना के लिए बीईएल ने कंटेनर तैयार किया, लेकिन वायुसेना इससे खुश नहीं है।

वायुसेना के सूत्रों का कहना है कि बीईएल का कंटेनर न केवल भारी है, बल्कि उसमें कई तरह की शिकायतें है। वायुसेना की इस रिपोर्ट को आधार बनाकर अमर उजाला ने खबर प्रकाशित की थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि बीईएल इसे ठीक करने के लिए लगातार समय बढ़वा रही है, लेकिन इसके बाद भी गुणवत्ता का कंटेनर देने में सफल नहीं हो पा रही है।

क्या है आकाश मिसाइल प्रणाली?

आकाश मिसाइल प्रणाली देश के वैज्ञानिकों द्वारा बनाई गई पहली प्रतिरक्षी मिसाइल है। यह प्रणाली दुश्मन के कम हवाई के हमले को स्वचालित तकनीक के सहारे खोजकर हवा में 30 किमी दूर ध्वस्त कर सकती है। डीआरडीओ की तरफ से विकसित इस मिसाइल का भारतीय सेना और वायुसेना में इंडक्शन भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) कराती है और भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड (बीईएल) इसके लिए रेडार, इलेक्ट्रानिक इक्पिमेंट आदि की आपूर्ति करती है। भारत ने आकाश मिसाइल प्रणाली को पाकिस्तान और चीन से लगती सीमा क्षेत्र में तैनात करने का निर्णय लिया है।

 

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें