इस मामले में बीडीएल के सीएमडी कमोडोर (रिटा.) सिद्धार्थ मिश्रा ने कहा कि बीडीएल ने सफलता पूर्व प्रेशराइज्ड मिसाइल कंटेनर विकसित किया है। हम भारतीय सेना को पीएमसी में ही आकाश मिसाइल दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी योजना बीडीएल को एक नई ऊंचाई देने में लगी है।
एमवी गौतमा ने स्वीकार किया कि बीडीएल का कंटेनल बीईएल से हल्का, यूजर फ्रेंडली है। मिसाइल के ट्रांसपोर्टेशन में बीईएल के कंटेनर से अधिक उपयुक्त है। हालांकि लीकेज के मामले में वह बीईएल के कंटेनर जैसी गारंटी नहीं दे सकता। गौतमा ने कहा कि हम इस झमेले में नहीं पड़ना चाहते थे। आकाश के लिए कंटेनर की आपूर्ति का काम बीडीएल का था। वह नहीं कर पा रहा था।
उसने जो कंटेनर तैयार करके आठ स्क्वाड्रन आकाश की आपूर्ति में दिया था, उसमें लीकेज की शिकायत थी। इसलिए बीईएल ने प्रेशराइज्ड मिसाइल कंटेनर तैयार किया था। हीलियम लीक टेस्टिंग में यह सफल है। गौतमा ने कहा कि यह कोई रॉकेट साइंस तो है नहीं। बीईएल कंटेनर की आपूर्ति मामले में अपने कदम पीछे खींच लेगी।
डीआरडीओ ने आकाश मिसाइल प्रणाली विकसित की है। इसे भारतीय सेना में शामिल किया जा चुका है। हाल में वायुसेना ने भी अपने बेड़े में सात स्क्वाड्रान आकाश मिसाइल प्रणाली को शामिल करने का निर्णय ले लिया है। आकाश मिसाइल आम तौर पर वातानुकूलित स्टोरेज में रखी जाती है। लेकिन लड़ाई के मैदान में ले जाने के लिए इसे कंटेनर में ले जाया जाता है।
आकाश मिसाइल प्रणाली देश के वैज्ञानिकों द्वारा बनाई गई पहली प्रतिरक्षी मिसाइल है। यह प्रणाली दुश्मन के कम हवाई के हमले को स्वचालित तकनीक के सहारे खोजकर हवा में 30 किमी दूर ध्वस्त कर सकती है। डीआरडीओ की तरफ से विकसित इस मिसाइल का भारतीय सेना और वायुसेना में इंडक्शन भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) कराती है और भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड (बीईएल) इसके लिए रेडार, इलेक्ट्रानिक इक्पिमेंट आदि की आपूर्ति करती है। भारत ने आकाश मिसाइल प्रणाली को पाकिस्तान और चीन से लगती सीमा क्षेत्र में तैनात करने का निर्णय लिया है।