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तेलंगाना के एक वैज्ञानिक का दावा- सूर्योदय से पहले पांच ग्रहों को आप बिना दूरबीन के देख सकेंगे

Mon, 20 Jul 2020 03:56 AM IST
अवधेश कुमार अमर उजाला, नेटवर्क, हैदराबाद
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डेमो - फोटो : डेमो
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एक असाधारण खगोलीय घटना के तहत आने वाले हफ्ते में आप पांच ग्रहों को अपनी आंखों से देख सकेंगे। इसके लिए किसी दूरबीन वगैरह की भी जरूरत नहीं पडे़गी। खास बात यह है कि यह नजारा धरती के किसी भी हिस्से से सूर्योदय होने से पहले 45 मिनट तक देखा जा सकेगा। तेलंगाना के एक वैज्ञानिक ने यह दावा किया है। 

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वैज्ञानिक बीजी सिद्धार्थ के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति पांच सौरमंडल के पांच ग्रहों बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति और शनि को अपनी आंखों से चमचमाते हुए देख सकता है। हालांकि, इसे दिन-भर नहीं देखा जा सकता है। बताया जा रहा है कि रविवार से शुरू हुए इस अद्भुत खगोलीय नजारे को शाम से लेकर सूर्योदय से ठीक पहले तक देखा जा सकेगा। 

हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस नजारे को देखने का सबसे उपयुक्त समय सूर्योदय से ठीक 40 मिनट पहले होगा। सूर्योदय होने के पांच मिनट बाद तक भी इन नजारे को देखा जा सकेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह घटना दो वर्ष बाद दिखने जा रही है, जिसे आसमान में 20 से 25 जुलाई के बीच हर रोज देखा जा सकता है। अगर आप गलती से इस दृश्य को देखने से चुक जाते है तो फिर दो साल का इंतजार करने पड़ेगा।

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दक्षिण में चमकता दिखेगा मंगल

खगोलशास्त्री जेफ्री हंट की मानें तो इस दौरान मंगल ग्रह दक्षिण में चमकता दिखेगा। वहीं अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक, आकाश में सबसे ऊंचा चमकता तारा मंगल ही होगा। जबकि, शुक्र ग्रह उत्तर पूर्व में दिखेगा। वहीं, बृहस्पति और शनि ग्रह दक्षिण पश्चिम दिशा में टिमटिमाते नजर आएंगे। 

सौरमंडल के बाकी ग्रहों यूरेनस, नेप्चून और प्लूटो को दूरबीन से देख सकेंगे

वैज्ञानिक ने बताया कि सौरमंडल के बाकी ग्रहों यूरेनस, नेप्चून और प्लूटो को खुली आंख से नहीं देखा सकेंगे। इसके लिए दूरबीन का इस्तेमाल करना होगा।
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महाराष्ट्र से एक साल के सफर के बाद अंतरिक्ष

अंतरिक्ष अनुसंधान परियोजना के लिए बीते साल महाराष्ट्र एक बड़ी मशीन लेकर निकला ट्रक रविवार को तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर पहुंच गया। ट्रक के साथ आए एक सदस्य ने कहा, हमने यह सफर 8 जुलाई, 2019 को महाराष्ट्र से शुरू किया था। चार राज्यों से गुजरने के बाद इसे स्पेस सेंटर को मशीन सौंप दी गई। 

यह मशीन एयरोस्पेस हॉरिजोन्टल ऑटोक्लेव है, जो भारहीन पदार्थों को निर्माण करेगी। ट्रक रोजाना सिर्फ पांच किमी की यात्रा ही करता था। इसके साथ 32 स्टाफ थे। मशीन का कुल वजन 70 टन और चौड़ाई 7.5 मीटर थी।
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