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हरियाणा और महाराष्ट्र में कांग्रेस की लड़ाई विरोधियों से कम 'अपनों' से है ज्यादा

Sat, 05 Oct 2019 07:09 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला
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Sanjay Nirupam and Ashok Tanwar - फोटो : AmarUjala
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हरियाणा और महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को मतदान होना है। नवरात्रों के बाद कांग्रेस पार्टी दोनों राज्यों में प्रचार अभियान को धार देने जा रही है। लेकिन पार्टी के सबसे बड़ी चुनौती विरोधी दलों के प्रत्याशियों से ज्यादा अपनों से है। जहां हरियाणा में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर, तो महाराष्ट्र में संजय निरूपम कांग्रेस की जड़ों में मट्ठा डालने के लिए तैयार हैं। दोनों ही राज्यों में सीनियर बनाम जूनियर की लड़ाई पार्टी की परेशानी बढ़ा रही है।

सिंधिया और पायलट ने खुद को किया सीमित

सोनिया गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद रिटायरमेंट के दरवाजे में खड़े कांग्रेसी जहां चैतन्य हो रहे हैं, वहीं पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के समय में अग्रिम कमान संभालने वाले कांग्रेसी नेताओं के हौसले पस्त हो रहे हैं। मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने आपको काफी सीमित कर लिया है, तो राजस्थान में सचिन पायलट भी अब समय के रुख को देखकर चल रहे हैं। वहीं दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री कमलनाथ और अशोक गहलोत की पौ बारह है।

राहुल-प्रियंका करेंगे प्रचार

हालांकि महाराष्ट्र और हरियाणा में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के प्रचार अभियान का कार्यक्रम तैयार है। दशहरा के बाद कांग्रेस पार्टी प्रचार अभियान में तेजी लाएगी। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी स्वास्थ्य कारणों से सीमित प्रचार करेंगी। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश में मोर्चा खोल रखा है, लेकिन वह दोनों राज्यों के चुनाव प्रचार में भी सक्रिय रहेंगी। इन सबके बावजूद युवा कांग्रेस के नेताओं का उत्साह कम दिखाई दे रहा है। कांग्रेस पार्टी के मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला के चेहरे पर अब इसकी बानगी दिखाई देने लगी है।

कैसे करेगी संगठित भाजपा का मुकाबला?

राहुल गांधी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद अपने पद से इस्तीफा देने वाले एक युवा नेता का कहना है कि अपनी ही पार्टी का कुछ समझ में नहीं आ रहा है। सूत्र का कहना है कि न तो कांग्रेस युवाओं को संदेश दे पा रही है और न ही युवाओं की महत्वाकांक्षा में संतुलन बना पा रही है। राहुल गांधी की टीम का सदस्य कहे जाने वाले नेताओं के अनुसार, हमें खुद समझ में नहीं आ रहा है कि आधे बल से हरियाणा और महाराष्ट्र में लड़कर कांग्रेस पार्टी आखिर कैसे संगठनात्मक शक्ति में मजबूती के साथ खड़ी भाजपा का मुकाबला कर पाएगी? सूत्र का कहना है कि कांग्रेस में तो अभी हम आपस में ही बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं।

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