संजय मिश्र
नई दिल्ली। देश में बीफ विवाद को लेकर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मियों के बीच भाजपा ने इसके सियासी नफे—नुकसान का आंकलन किया है। बीफ विवाद को लेकर पार्टी और केंद्र सरकार पर बेशक सवाल उठ रहे हैं। मगर भाजपा को बीफ का विवाद कहीं से भी नुकसान का सौदा नहीं लग रहा है। पार्टी के एक वरिष्ठ महासचिव के अनुसार केरल में कांग्रेस के नेता ने गौ हत्या कर आत्मघाती कदम उठाया है। भाजपा इस मुद्दे को आक्रामक रूप से जनता के बीच लेकर जाएगी। पार्टी अपनी छवि गोरक्षक और पशुरक्षक के रूप में पेश करेगी। राजनीतिक नुकसान पर भाजपा महासचिव का कहना है कि देश में बीफ खाने वालों की संख्या महज 2 प्रतिशत होगी। इसके अलावा इस व्यवसाय से जुड़े लोगों की संख्या भी 2 प्रतिशत से ज्यादा नहीं है। उक्त नेता के अनुसार पार्टी बहुसंख्यक की राजनीति को आगे बढ़ाएगी।
गोहत्या के मामले को दलित बिरादरी से जुड़ने नहीं देगी भाजपा
बीफ विवाद को राजनीतिक लाभ का सौदा मान रहे भाजपा आलाकमान की नजर इससे जुडी घटनाओं पर पल—पल की नजर है। पार्टी इस मामले को किसी जाति विशेष खासतौर से दलितों से जुड़ने नहीं देगी। भाजपा कैडर आधारित पार्टी है कार्यकर्ताओं के माध्यम से मुद्दे को नियंत्रित करेंगे। पार्टी के वरिष्ठ नेता का कहना है कि मुख्य मुद्दे को हम भटकने नहीं देंगे। भाजपा पूरी तरह से गौरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। इस मौके का लाभ उठाने में पार्टी कोई चूक नहीं करेगी। मामले में मेघालय सरीखे छोटे राज्य से पार्टी के अंदर से उठ रहे विरोध की पार्टी रणनीतिकारों को परवाह नहीं है। पार्टी का आंकलन है कि मेघालय और पूर्वोत्तर के एक—दो राज्यों में इस मुद्दे का विपरीत असर पड़ सकता है। पर देश के शेष अन्य हिस्सों में इसका सियासी लाभ होगा। दक्षिण से उत्तर तक पार्टी इसे लाभ का सौदा देख रही है। पार्टी के एक वरिष्ठ महासचिव का कहना है कि मवेशियों की हत्या का कदम राजनीतिक लाभ के मकसद से नहीं लिया है। मगर जब यह राजनीतिक मुद्दा बन गया है तो इसका पूरा लाभ लेंगे।
क्यों बरपा है बीफ विवाद
रमजान के पहले ही दिन मोदी सरकार ने पूरे देश में गाय सहित मवेशियों की हत्या के लिए खरीद-फरोख्त पर बैन लगाने का निर्णय लिया। मवेशियों के खरीद-फरोख्त के दौरान अब यह एफिडेविट देना होगा कि इनका इस्तेमाल हत्या के लिए नहीं बल्कि कृषि उद्देश्य के लिए होगा।
पर्यावरण मंत्रालय ने इस मामले में एक नया नियम बनाया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा पशु क्रूरता निवारण (पशुधन बाजार नियमन) नियम, 2017 के तहत कोई भी मवेशी को तब तक बाजार में नहीं ला सकता जब तक कि वह यह लिखित घोषणापत्र नहीं देता कि मवेशी को मांस करोबार के लिए हत्या करने के मकसद से नहीं बेचा जा रहा है। उसे बताना होगा कि वह मवेशी को कृषि संबंधी उद्देश्य से ही बेच रहा है।
केंद्र के फैसले के विरोध में कांग्रेस का बीफ फेस्ट
मवेशी हत्या खरीद—फरोख्त कानून का विरोध कर कांग्रेस पार्टी की राजनीति बूरी तरह से फंस गई है। केरल बीफ फेस्ट कांग्रेंस के गले की हडडी बन गया है। पार्टी पहले से ही जनता में कमजोर पड़ रही है। ऊपर से केरल कांग्रेस के नेताओं ने गौहत्या कर पार्टी आलाकमान की मुश्किलें बढ़ा दी है। कांग्रेस की इस गलती को भाजपा अपने लिए तुरूप का इक्का मान रही है। भाजपा की रणनीति इस विवाद को लंबा खींचने की है, ताकि गुजरात चुनाव में पार्टी इसे बड़ा मुद्दा बना सके। पार्टी ने अलग—अलग जगहों से कांग्रेस और वाम दलों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं कि वे गोहत्या, पशुवध और पशुरक्षा पर वे अपना मत सार्वजनिक करें।