अटलजी के प्रधानमंत्री रहते वर्ष 2002 के आसपास कैबिनेट की बैठकों में लड्डू-जलेबी जैसी मिठाईयों पर अघोषित प्रतिबंध लग गया था। दरअसल, खराब स्वास्थ्य और वजन बढ़ने के कारण उन्हें मिठाई खाने की मनाही थी। तब कैबिनेट की बैठकों में अवसर मिलते ही बच्चों की भांति वाजपेयी मिठाईयों पर हाथ साफ करने में देर नहीं लगाते थे।
एक बार तो वाजपेयी ने अपने प्लेट में लड्डू न रखने पर वेटर को डांटने से भी परहेज नहीं किया था। वाजपेयी के बेहद करीबी रहे दिवंगत प्रमोद महाजन उनके खाने-पीने की आदतों पर कई दिलचस्प वाकया साझा करते रहे थे।
दरअसल, वाजपेयी को नॉनवेज में झींगा मछली, मालपुआ, खीर, लड्डू, जलेबी, रेबड़ी बहुत पसंद थी। वजन बढ़ने और स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद घर पर परिवार वाले उन्हें इन चीजों से दूर रखते थे। अपनी पसंद की मिठाईयों पर हाथ साफ करने के लिए तब अटल हर हफ्ते होने वाली कैबिनेट की बैठक का इंतजार करते थे। उस दौरान वह वहां पेश की जाने वाली मिठाईयों पर हाथ साफ कर लेते थे। बाद में दिवंगत प्रमोद महाजन के निर्देश पर कैबिनेट की बैठकों में मिठाईयों की आपूर्ति बंद कर दी गई थी।
वर्ष 2004 में भाजपा के सत्ता गंवाने के एक साल बाद महाजन ने पत्रकारों को वाजपेयी का एक दिलचस्प किस्सा सुनाया था। बकौल महाजन वाजपेयी की किसी प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक थी। वाजपेयी ने वहां पहुंचते ही समोसे के साथ लड्डू लाने का आदेश सुना दिया। उस बैठक में मौजूद महाजन ने मिठाईयां परोसने वाले वेटर को वाजपेयी के प्लेट में लड्डू न रखने की सख्त हिदायत दी।
आदेश के मुताबिक, वेटर ने जब एक बार वाजपेयी के प्लेट में लड्डू नहीं रखा तो उन्होंने वेटर को घूर कर देखा। दूसरी बार जैसे ही लड्डू परोसने की बारी आई और वेटर उनकी प्लेट में लड्डू रखे बिना जाने लगा तो उसे वाजपेयी ने तेज फटकार लगाई। वेटर ने घबराकर सर्व ट्रे सामने ही रख दिया और वाजपेयी आराम से ट्रे से लड्डू निकाल कर खाने लगे।