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बेअंत सिंह हत्या मामला: राजोआना की याचिका पर फैसला नहीं लेने पर सुप्रीम कोर्ट नाखुश, केंद्र से मांगा जवाब

Wed, 28 Sep 2022 03:44 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शीर्ष अदालत ने 2 मई को केंद्र से मामले में राजोआना की ओर से दायर कम्यूटेशन याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला करने को कहा था।
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बलवंत सिंह राजोआना (फाइल) - फोटो : PTI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बलवंत सिंह राजोआना की उस याचिका पर अब तक कोई फैसला नहीं लेने पर केंद्र के खिलाफ असंतोष व्यक्त किया, जिसमें पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में हुई हत्या में उसकी मौत की सजा को 26 साल की लंबी कैद के आधार पर उम्रकैद में बदल दिया गया था। केंद्र के वकील द्वारा मामले को स्थगित करने के अनुरोध पर शीर्ष अदालत भी नाखुश थी। 

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अदालत ने केंद्र से एक हलफनामा दायर करने को कहा
अदालत ने कहा कि दो महीने का समय 2 मई (इस साल) को दिया गया था। समय बहुत पहले समाप्त हो गया है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज के मुताबिक संबंधित प्राधिकरण द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने केंद्र से एक हलफनामा दायर करने और मामले को शुक्रवार को सूचीबद्ध करने के लिए कहा।  

सीजेआई ने बेंच की ओर से बोलते हुए कहा, हम जब कोई निर्देश देते हैं, उन्हें (अधिकारियों को) दया याचिका पर विचार करना चाहिए। जिम्मेदार अधिकारी कौन है? क्या इस मुद्दे पर नोट तैयार किया गया है...हम आपको एक विशेष निर्णय लेने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। लेकिन आपको निर्णय लेना होगा। केंद्र सरकार के वकील द्वारा कार्यवाही को स्थगित करने की मांग पर अदालत ने कहा, आप जानते हैं कि स्थगित होने के बाद इन मामलों का क्या होता है, रजिस्ट्री के साथ क्या होता है, जब हम किसी मामले को आगे बढ़ाते हैं, यह प्रक्रिया में चला जाता है और इसक नंबर छह महीने बाद आता है।
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मई में केंद्र से दो महीने के भीतर फैसला करने को कहा था
इसके बाद अदालत ने आदेश दिया कि संबंधित विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी द्वारा एक हलफनामा दायर किया जाए जिसमें मामले में हुई प्रगति को दर्शाया गया हो और शुक्रवार को सूचीबद्ध किया जाए। शीर्ष अदालत ने 2 मई को केंद्र से मामले में राजोआना की ओर से दायर कम्यूटेशन याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला करने को कहा था। बाद में केंद्र के वकील द्वारा पेश 27 जुलाई, 2022 के एक पत्र के संदर्भ में मामले को 13 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया था। इससे पहले शीर्ष अदालत ने केंद्र की इस दलील पर विचार नहीं किया कि मौत की सजा पाने वाले दोषी का यह कहना रिकॉर्ड में है कि उसे भारतीय न्यायपालिका और संविधान में कोई विश्वास नहीं है।  
  
पीठ ने कहा कि ये सभी हमारे नागरिक हैं और जब हम अपने नागरिकों के साथ व्यवहार कर रहे हैं तो हमें दया करनी चाहिए, खासकर जब मामला मौत की सजा का हो। अदालत ने कहा था कि मामले में शीर्ष अदालत में अन्य सह-आरोपियों की अपीलों का लंबित होना, राजोआना की दया याचिका पर फैसला करने में अधिकारियों के आड़े नहीं आएगा। 

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