बयान में कहा गया, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने निहित स्वार्थ वाले कुछ लोगों के सुप्रीम कोर्ट और उसके न्यायाधीशों की छवि खराब करने के प्रयासों की कड़ी निंदा की है। इस तरह की बढ़ती प्रवृत्ति वास्तव में गंभीर चिंता का विषय है।
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बार काउंसिल ऑफ इंडिया
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने रविवार को कहा कि निहित स्वार्थ वाले कुछ लोग जानबूझकर न्यायाधीश जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की छवि को खराब करने का प्रयास कर रहे हैं, क्योंकि वह भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बनने की कतार में हैं।
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न्यायपालिका के कामकाज में हस्तक्षेप करने का घृणित प्रयास
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
बीसीआई ने आरके पठान द्वारा प्रसारित एक पत्र की निंदा की और कहा कि यह न्यायपालिका के कामकाज और न्याय के प्रशासन में हस्तक्षेप करने के घृणित और दुर्भावनापूर्ण प्रयास है। पठान खुद के 'सुप्रीम कोर्ट एंड हाईकोर्ट लिटिगेंट एसोसिएशन' का प्रमुख होने का दावा करते हैं।
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बीसीआई ने की न्यायाधीशों और सुप्रीम कोर्ट की छवि खराब करने के प्रयासों की निंदा
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सु्प्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
बयान में कहा गया, "बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने निहित स्वार्थ वाले कुछ लोगों के सुप्रीम कोर्ट और उसके न्यायाधीशों की छवि खराब करने के प्रयासों की कड़ी निंदा की है। इस तरह की बढ़ती प्रवृत्ति वास्तव में गंभीर चिंता का विषय है। इसे किसी भी तरह से जांचना होगा।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की पदोन्नति से पहले जानबूझकर वायरल किया जा रहा पत्र
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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
वकीलों के शीर्ष वैधानिक निकाय ने आगे कहा, आरके पठान का एक पोस्ट और पत्र कुछ लोगों द्वारा वायरल किया जा रहा है, जिसमें हम जानते हैं कि मुंबई के भी दो-तीन वकील हैं। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में पदोन्नति से पहले यह जानबूझकर किया जा रहा है।
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न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ पर देश और बार काउंसिल का भरोसा
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dy chandrachud
बीसीआई ने अपने अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के हवाले से कहा कि उन्होंने 165 पन्नों के पत्र की सामग्री की पूरी तरह से जांच की है और इसे न्यायपालिका के कामकाज और न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करने के लिए एक अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण प्रयास पाया है।
बयान में आगे कहा गया है कि देश और बीसीआई को न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ पर पूरा भरोसा है। न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ दुनिया की न्यायपालिका के लिए एक संपत्ति हैं और अपने ज्ञान, ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि ऐसे लोकप्रिय न्यायधीशों पर भी हमला किया जा रहा है।
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8 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त होंगे यूयू ललित
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CJI UU Lalit
- फोटो : ANI
बयान में कहा गया है कि आरके पठान का कोई विवरण शिकायत में प्रस्तुत नहीं किया गया है और उस संगठन का कोई पता नहीं है, जिसका प्रतिनिधित्व करने का वह दावा करते हैं। बता दें कि मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति यूयू ललित 8 नवंबर को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं।
उपासना स्थल कानून पर पर्सनल लॉ बोर्ड भी पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
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सांकेतिक फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) भी उपासना स्थल कानून 1991 के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बोर्ड ने इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है। इन याचिकाओं में कानून की वैधता को चुनौती दी गई है। यह कानून उपासना स्थलों की 15 अगस्त, 1947 की स्थिति को बरकरार रखने की बात करता है और ऐसे किसी स्थल पर कब्जा हासिल करने के लिए कोर्ट में मुकदमेबाजी को प्रतिबंधित करता है। अपनी याचिका में बोर्ड ने शीर्ष अदालत को कहा है कि यह बेहद ही प्रगतिशील कानून है, जो भारतीय राजनीति के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के अनुरूप है। यह विभिन्न समुदायों के बीच सौहार्द, शांति और स्थिरता को बढ़ावा देता है। चीफ जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ इस कानून को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर 11 अक्तूबर को सुनवाई करने वाली है।