बार काउंसिल ऑफ इंडिया यानी बीसीआई के कामकाज को लेकर वकीलों का विरोध तेज हो गया है। वकीलों के एक समूह ने बीसीआई कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कामकाज में अनियमितताओं का आरोप लगाया और बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन में वकीलों ने अपनी कई मांगें भी सामने रखीं। अधिवक्ता सुरक्षा कानून लागू करने, सभी वकीलों को बीमा कवर देने, कानून कॉलेजों का नियमित और पारदर्शी निरीक्षण कराने की मांग की गई।
बीसीआई कार्यालय के बाहर प्रदर्शन क्यों हुआ?
यह प्रदर्शन ऑल इंडिया यंग एडवोकेट्स एसोसिएशन ने बुलाया था। इसे कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन मिला। प्रदर्शनकारियों ने बीसीआई के कामकाज में अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग भी की। साथ ही वकीलों की सुरक्षा और बीमा से जुड़े मुद्दे उठाए।
नालसार छात्रों को लेकर क्या था पूरा विवाद?
मनन कुमार मिश्रा हाल में नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों से जुड़े एक विवाद के कारण आलोचनाओं में रहे थे। विवाद तब शुरू हुआ, जब नालसार के कुछ छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार और प्रोफेसरों को पत्र लिखा। छात्रों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बुलाने के किसी भी प्रस्ताव का विरोध किया था।
इसके बाद बीसीआई अध्यक्ष मिश्रा ने एक परिपत्र जारी किया। इसमें कहा गया कि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश की भागीदारी के खिलाफ चलाए गए कथित अभियान के आरोपों की जांच की जा रही है। जिम्मेदार लोगों की पहचान करते हुए रिपोर्ट भी मांगी गई। इसी क्रम में एक आदेश जारी कर राज्य बार काउंसिलों से कहा गया था कि नालसार के मौजूदा बैच से स्नातक होने वाले किसी भी छात्र का अधिवक्ता के रूप में नामांकन न किया जाए।
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आलोचना के बाद क्यों बदला गया फैसला?
कानूनी बिरादरी के लोगों की आलोचना के बाद यह फैसला कुछ ही घंटों में वापस ले लिया गया। बाद में जारी संशोधित आदेश में कहा गया कि छात्रों की बड़ी संख्या”निर्दोष है। कुछ लोगों के कथित कृत्य की सजा सभी छात्रों को नहीं दी जानी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी इस आदेश को लेकर बीसीआई को कड़ी फटकार लगाई थी। उन्होंने कहा था कि यह छात्रों और मेरे बीच का संवाद है।
इसके बाद नालसार स्टूडेंट बार काउंसिल ने मनन कुमार मिश्रा से सार्वजनिक माफी की मांग की। नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बंगलूरू के स्नातक होने वाले छात्रों, मौजूदा छात्रों और पूर्व छात्रों ने भी संयुक्त बयान जारी किया। उन्होंने भी इसी तरह की माफी की मांग की और अपने दीक्षांत समारोह में बीसीआई अध्यक्ष तथा मुख्य न्यायाधीश की मौजूदगी का विरोध किया।
मिश्रा ने स्वतंत्रता दिवस पर जारी बयान में कानून के छात्रों से माफी मांगी थी। उन्होंने कहा था कि हाल की घटनाओं से छात्रों के बीच चिंता पैदा हुई। अगर उनके किसी शब्द या संदेश से छात्रों की भावनाएं आहत हुईं तो उन्हें इसका खेद है।