नबीर -ए- आला हजरत ताजुश्शरिया अल्लामा मुफ्ती अख्तर रजा खां कादरी (अजहरी मियां) ने जुमे की नमाज में खुतवे के दौरान कहा कि केंद्र सरकार और केंद्रीय कानून आयोग को तीन तलाक के मामले में किसी भी तरह का हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। एक साथ तीन बार तलाक, तलाक, तलाक बोलने से तलाक माना जाएगा, यही कुरान कहता है। अहदे रिसालत (मोहम्मद साहब) के जमाने से आज तक इसी के मुताबिक फैसला होता रहा है।
उन्होंने कहा कि इसी इस्लामी नजरिए से कोर्ट तथा कचहरियों में मुसलमानों के बारे में फैसले होते रहे हैं। लोकसभा के अंदर संशोधन बिल लाकर एक तलाक का फैसला करना मुस्लिम पर्सनल ला शरीयत में हस्तक्षेप और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन होगा। जिसे किसी भी हालत में भारतीय मुसलमान बर्दाश्त नहीं करेगा। यदि केंद्र सरकार ने अपना फैसला वापस नहीं लिया तो शरई कौंसिल आफ इंडिया बरेली शरीफ इसको लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होगी।
एक अन्य बयान में रजा एकेडमी मुंबई के मौलाना सईद नूरी, बरेली के शहर काजी मौलाना असजद रजा खां कादरी और जमात रजा- ए- मुस्तफा के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने एक स्वर से समान नागरिक संहिता का विरोध किया है।