बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने पूरे देश के 5,970 वकीलों को प्रैक्टिस करने से तब तक के लिए निलंबित कर दिया, जब तक वे एडवोकेट वेलेफेयर फंड (एडब्ल्यूएफ) के लिए अपना लंबित अंशदान जमा नहीं करा देते। एडवोकेट्स वेलफेयर फंड (बीसीआई) कमेटी ने वकीलों को कई नोटिस और चेतावनी देने के बाद इस कार्रवाई का सहारा लिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि फंड में अंशदान नहीं करने वाले वकील पूरे देश की किसी भी अदालत में प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे। बार कौंसिल ऑफ इंडिया के नियम संख्या-40, अध्याय-2, भाग-6 में स्पष्ट किया गया है कि वकील के तौर पर पंजीकरण कराने वाले हर व्यक्ति को एडब्ल्यूएफ का सब्सक्रिप्शन अनिवार्य तौर पर लेना होगा।
इस सब्सक्रिप्शन का हर तीन साल में नवीनीकरण कराना होता था, लेकिन 1993 से इसे आजीवन कर दिया गया था। हालांकि इसका अंशदान पंजीकरण के समय ही जमा कराना अनिवार्य किया गया था। 1993 से पहले पंजीकृत हुए वकीलों को यह अंशदान सालाना जमा कराना होता है।
पिछले साल नवंबर में बार कौंसिल ने कहा था कि 7 हजार से ज्यादा वकीलों ने अंशदान जमा नहीं कराया है, जिन्हें नोटिस भेजा गया है। इसके बावजूद 5,970 वकीलों के अंशदान जमा नहीं कराने पर 21 मार्च को बीसीआई कमेटी ने उन्हें निलंबित करने का निर्णय लिया, जिसकी जानकारी 23 मार्च को सभी राज्यों की बार कौंसिल को भेज दी गई है।