फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Taslima Nasreen: 19 साल बाद कोलकाता लौटने पर भावुक हुईं तस्लीमा नसरीन, बोलीं- यह घर वापसी

Fri, 31 Jul 2026 01:08 PM IST
नितिन गौतम एएनआई, कोलकाता

सार

बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन 19 साल बाद कोलकाता पहुंचीं और इसे अपने देश लौटने जैसा बताया। 2007 में विरोध प्रदर्शनों के बाद उन्हें शहर छोड़ना पड़ा था। उन्होंने कहा कि उनकी वापसी अभिव्यक्ति की आजादी और कट्टरपंथ के खिलाफ उनकी आवाज की वापसी का प्रतीक है।
विज्ञापन
बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन शुक्रवार को 19 साल बाद कोलकाता पहुंचीं। कोलकाता पहुंचने पर तस्लीमा नसरीन बेहद खुश दिखाई दीं। कोलकाता पहुंचने पर तस्लीमा नसरीन ने कहा कि यह मेरे लिए अपने देश लौटने जैसा है। मैं खुशी और दर्द दोनों के साथ लौटी हूं।

विज्ञापन


क्या है पूरा मामला? 
साल 2003 में तस्लीमा नसरीन की किताब द्विखंडित पर पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया था। तस्लीमा नसरीन पर मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगा था। इसके बाद साल 2007 में हुए भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद तस्लीमा नसरीन को कोलकाता छोड़ना पड़ा था। 

कार्यक्रम में लेंगी हिस्सा
वे 1 अगस्त को कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और मशहूर साहित्यकार शिर्षंदु मुखोपाध्याय के भी शामिल हो सकते हैं।  
विज्ञापन


कोलकाता लौटना को देश लौटना जैसा क्यों बताया? 
अपनी यात्रा से पहले, नसरीन ने पीटीआई से कहा कि कोलकाता लौटना अपने ही देश में लौटने जैसा है और लगभग 19 साल के निर्वासन के बावजूद उन्होंने इस शहर को अपना घर बताया। उन्होंने कहा था, 'मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं अपने ही देश लौट रही हूं। मेरे दिल में बंगाल कभी भी किसी सीमा या कंटीले तार की बाड़ से बंटा नहीं रहा। बंगाल के पूर्वी हिस्से का दरवाजा मेरे लिए बंद है, इसलिए अभी के लिए, बंगाल का यह हिस्सा ही मेरा घर है।'

'अपनी मर्जी से कोलकाता नहीं छोड़ा'
उन्होंने कहा था, 'मैंने कभी अपनी मर्जी से कोलकाता नहीं छोड़ा। तत्कालीन पश्चिम बंगाल सरकार ने मुझे राज्य छोड़ने पर मजबूर किया था। फिर भी मैंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी कि एक दिन मैं वापस आऊंगी।'

उन्होंने अपनी वापसी को सिर्फ निजी तौर पर घर लौटने से कहीं ज्यादा बताया। उन्होंने कहा कि यह उस आवाज की वापसी का प्रतीक है जिसे कट्टरपंथियों ने कभी दबाने की कोशिश की थी और यह अभिव्यक्ति की आजादी के महत्व को फिर से स्थापित करता है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें