बांग्लादेश सरकार ने एंटी-करप्शन कमीशन (एसीसी) को कारोबार में होने वाली हर प्रकार की मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप की जांच करने का अधिकार दे दिया है। सरकार की तरफ से कहा गया है कि नए अधिकार मिलने के बाद एसीसी पूंजी बाजार में होने वाली धोखाधड़ी, गैर-कानूनी ढंग से धन विदेश भेजने, आयात-निर्यात के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग और हुंडी जैसे गैर-कानूनी वित्तीय चलन के मामलों का पर्दाफाश कर पाएगी। इसके पहले एसीसी को 27 प्रकार के अपराधों का अधिकार हासिल था। अब उसे लोक सेवकों के भ्रष्टाचार और घूसखोरी की जांच का भी अधिकार मिल गया है।
बांग्लादेश में हाल में भ्रष्टाचार और काला धन से जुड़े आरोपों की झड़ी लगी रही है। इससे शेख हसीना वाजेद के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार की छवि खराब हुई है। कुछ महीनों के बाद बांग्लादेश में आम चुनाव होने वाले हैं। समझा जाता है कि ताजा कदम के जरिए सरकार ने अपनी छवि बेहतर बनाने की कोशिश की है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ शेख हसीना सरकार के रिकॉर्ड की पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संस्थान ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल ने आलोचना की थी। इस संस्था की बांग्लादेश शाखा के कार्यकारी निदेशक इफ्तेखारुजम्मां ने शुक्रवार को अखबार द बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा- ‘हमारी राय में एसीसी को मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित सभी प्रकार के अपराधों की जांच का अधिकार होना चाहिए। जब मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन ऐक्ट बना था, तब एसीसी को यह अधिकार हासिल था। लेकिन हमें यह नहीं मालूम की बाद में उससे यह अधिकार क्यों वापस ले लिया गया।’
अन्य विशेषज्ञों ने कहा है कि अगर भ्रष्टाचार की लड़ाई में एसीसी को सचमुच प्रभावी बनाना है, तो उसे कुशल और प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध करवाने होंगे, जो व्यापार के क्रम में होने वाली मनी लॉन्ड्रिंग की जटिलताओं को समझने में सक्षम हों। एसीसी के पूर्व आयुक्त नसीरुद्दीन के मुताबिक एसीसी के पास अभी भी कुशल कर्मचारियों का अभाव है। उसके पास ऐसे कर्मचारी नहीं हैं, जो मनी लॉन्ड्रिंग के सभी मामलों की जांच कर सकने में सक्षम हों।
नसीरुद्दीन ने कहा- ‘व्यापार के क्रम में होने वाली मनी लॉन्ड्रिंग एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया है, जिसकी जांच के लिए विशेषज्ञता चाहिए। ऐसी विशेषज्ञता ना होने के कारण ऐसी जांच करमो में पहले भी एसीसी को दिक्कतें पेश आई थीं। अभी भी एसीसी के पास वैसे सक्षम कर्मचारी नहीं हैं।’
ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल, प्राइसवाटरहाउस कूपर और ग्लोबल फाइनेंशियल इंटेलीजेंस जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की तरफ से किए गए सर्वेक्षणों के आधार पर एसीसी अधिकारियों ने कहा है कि बांग्लादेश में 80 फीसदी मनी लॉन्ड्रिंग आयात-निर्यात की आड़ में होती है। दूसरी तरफ गुजरे वर्षों में कानून में कई संशोधनों के जरिए एसीसी के पर कतरे जाते रहे, जिससे फिलहाल वह ऐसे मामलों की जांच में अक्षम हो गई है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि ऐसी ही आलोचनाओं से अपने बचाव के लिए शेख हसीना सरकार ने ताजा कदम उठाया है। दूसरी तरफ विपक्ष पुराने उदाहरणों के आधार पर सरकार पर हमला जारी रखे हुए है। पर्यवेक्षकों ने संभावना जताई है कि अगले आम चुनाव तक भ्रष्टाचार का मुद्दा गरम बना रहेगा।