पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा और टीएमसी दोनों के ही प्रचार गीत और नारे पड़ोसी देश बांग्लोदेश से प्रेरित हैं। टीएमसी का चुनाव प्रचार जिस ‘खेला होबे’ गीत के इर्द-गिर्द घूम रहा है वह दरअसल एक बांग्लादेशी गीत है, जिसे पार्टी ने मामूली बदलाव के साथ अपना लिया है। बांग्लादेशी अवामी लीग के सांसद शमीम उस्मान ने चार वर्ष पहले इस गीत का इस्तेमाल अपने प्रचार में किया था।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी हर जनसभा का अंत जिस ‘जय बांग्ला’ के नारे से करती हैं, वह भी बांग्लादेश आजादी आंदोलन के दौरान मुक्ति वाहिनी के प्रमुख शेख मुजीब-उर-रहमान का जयघोष था। वहीं, भाजपा भी अपनी हर सभा में पश्चिम बंगाल को ‘सोनार बांग्ला’ बनाने का वादा कर रही है।
दरअसल, यह गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की एक कविता से प्रेरित है, जो अब बांग्लादेश का राष्ट्रगीत है- ‘आमार सोनार बांग्ला, आमी तोमाके भालोबाशी (मेरा प्यारा बांग्ला, मुझे तुमसे बहुत प्यार है)।
बंगाली बनाम बाहरी का खेल
ममता के ‘जय बांग्ला’ उद्घोष के पीछे इस चुनाव को बंगाली बनाम बाहरी बनाने का प्रयास है। इसीलिए खेला होबे गीत में जहां उनकी सरकार की स्वास्थ्य साथी और कन्याश्री जैसी योजनाओं का जिक्र है, वहीं भाजपा को ‘बरगी’ करार दिया गया है। पेशवा साम्राज्य के दौरान बंगाल में घुसपैठ करने वाले आक्रमणकारियों को बांग्ला साहित्य में बरगी कहा जाता है।
कांग्रेस ने खेला होबे को बदला
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी के समर्थकों ने तृणमूल के खेला होबे को बदल दिया है, जिसके अनुसार अब अधीर दादा आ गया है ममता अपनी योजनाएं लेकर बंगाल से भागो।
बुआ-भतीजा भागो...भाजपा का एक और गाना बंगाल में लोकप्रिय हो रहा है, जिसमें कहा गया है पिशी (बुआ) जाओ। यह उनके भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी के संदर्भ में है, जिन्हें भाजपा भ्रष्टाचार, कटमनी, टोलाबाजी और दंगाबाजी के लिए जिम्मेदार बताती है।
माकपा का ‘टुम्पा सोना’...माकपा का प्रचार गीत ‘लुंगी डांस’ और ‘टुम्पा सोना’ है। इसमें एक काल्पनिक बच्चे टुम्पा के जरिए ममता बनर्जी सरकार के कामकाज की पोल खोली गई है