उच्चतम न्यायालय में शुक्रवार को बेअंत सिंह हत्याकांड मामले में दोषी बलवंत सिंह राजोआना की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की याचिका पर सुनवाई हुई। इसके बाद शीर्ष अदालत ने राजोआना की दया याचिका पर फैसला करने के लिए छह हफ्ते का वक्त दिया है। इस दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राष्ट्रपति ने इसक प्रक्रिया शुरू कर दी है। राजोआना की याचिका पर राष्ट्रपति को फैसला लेना है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय से इस मामले को छह हफ्ते तक टालने के लिए अनुरोध किया था। मेहता ने कहा कि राजोआना पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह का हत्यारा है और खालिस्तान के मुद्दे पर दोषी ने उनकी हत्या की थी।
केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे मेहता ने बताया कि राजोआना की दया याचिका पर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को इस याचिका पर फैसला लेना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति कब तक फैसला लेंगे, इस पर कुछ कह नहीं कर सकते। मामले को छह हफ्ते तक के लिए टाला जाए क्योंकि अभी राष्ट्रपति के फैसले का इंतजार करना चाहिए। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे ने कहा कि सरकार अपने हिसाब से वक्त बता सकती है, लेकिन राष्ट्रपति के फैसला लेने के लिए समय दिया जाना चाहिए। इसीलिए छह हफ्ते का वक्त दिया जा रहा है।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आखिरी मौका दिया था कि वो दो हफ्ते में राजोआना की दया याचिका पर फैसला करे। इससे पहले, सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार बलवंत सिंह राजोआना की अर्जी पर 26 जनवरी तक फैसला करे, जिसमें उसने सजा कम करने का अनुरोध किया है।
बता दें कि बलवंत सिंह राजोआना करीब 25 साल से जेल में है। साल 1995 में चंडीगढ़ स्थित सचिवालय के सामने हुए बम धमाकों में बेअंत सिंह समेत 18 लोगों की मौत हो गई थी। पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के लिए राजोआना को मौत की सजा सुनाई गई थी। राजोआना ने सजा और सजा के खिलाफ अपील नहीं की है। वो पिछले 25 सालों से जेल में है। दूसरों ने उसकी ओर से दया याचिका दायर की।