कौमी एकता दल के समाजवादी पार्टी में विलय के बाद से यूपी की सियासत गरमाई हुई है। समाजवादी पार्टी में ही इस फैसले को लेकर घमासान देखा जा रहा है। इसका पता इसी से चल जाता है कि अफजाल अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल के सपा में विलय के ऐलान के कुछ घंटे बाद ही प्रदेश सरकार के एक मंत्री की कुर्सी छिन जाती है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार को बड़ा फैसला लेते हुए प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव को तुरंत बर्खास्त कर दिया। तात्कालिक रूप से भले ही बलराम यादव की बर्खास्तगी का कारण माफिया मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का सपा में विलय कराने में उनकी भूमिका को माना जा रहा हो लेकिन, ऐसे संकेत मिल रहे थे कि मुख्यमंत्री उनसे काफी दिनों से नाराज थे। पिछले पखवारे से ही उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किए जाने की अटकलें चल रही थीं।
इस बीच यूपी मंत्रीमंडल से छुट्टी के बाद बुधवार को बलराम यादव मीडिया के सामने आए तो उनकी आंखों में आंसू थे। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ही मेरी जिंदगी है। उन्होंने कहा कि नेताजी (मुलायम सिंह यादव) मेरे अध्यक्ष ही नहीं बल्कि मेरे पिता हैं, संरक्षक हैं।
बाहुबलि का साथ मिलते ही बलराम की विदाई
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बता दें कि कौमी एकता दल के सपा में विलय के कुछ घंटे बाद ही बलराम यादव को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। माना ये जा रहा है कि मुख्यमंत्री चुनाव से पहले मुख्तार अंसारी जैसे आपराधिक छवि के लोगों को पार्टी में शामिल करने के सख्त खिलाफ हैं। बलराम की मंत्रिमंडल से विदाई के जरिए इसका कड़ा संदेश भी देने की कोशिश हुई है।
सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाने वाले बलराम यादव लोकसभा चुनाव के दौरान ही अखिलेश के निशाने पर आ गए थे। लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह आजमगढ़ से प्रत्याशी थे। आजमगढ़ में मुलायम सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर लग गई थी और तब भी खबरें आईं थीं कि बलराम यादव चुनाव में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहे हैं।
स्थानीय नेताओं के रवैये के चलते आजमगढ़ का चुनाव सपा के लिए भारी चुनौती बन गया था। तब बलराम यादव की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। सूत्रों की मानें तो मुलायम सिंह यादव के दबाव में अखिलेश बलराम को मंत्रिमंडल में बनाए हुए थे। मंत्रिमंडल में उनके कामकाज को लेकर सीएम संतुष्ट नहीं थे। मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच बीते सप्ताह मुलायम सिंह यादव से मुलाकात करने पहुंचे अखिलेश ने उन्हें हटाने के संकेत भी दे दिए थे।
अखिलेश को विश्वास में लिए बगैर विलय कराने पर गिरी गाज
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सूत्रों की मानें तो विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल के आजमगढ़ समेत आसपास के जिलों में चुनावी समीकरण साधने के लिए बलराम यादव कौमी एकता दल के समाजवादी पार्टी में विलय की जोरदार पैरवी भी कर रहे थे। कौएद के सपा में विलय के मामले में बलराम यादव सीधे मुलायम और शिवपाल से संपर्क बनाए हुए थे।
सूत्रों का कहना है कि न तो उन्होंने अखिलेश को इसकी जानकारी दी और न ही उन्हें विश्वास में लेने का प्रयास किया। अखिलेश यादव विधानसभा चुनाव को लेकर बेहद गंभीर हैं और वह कतई नहीं चाहते कि आपराधिक छवि के लोगों को पार्टी में शामिल किया जाए जिससे चुनाव में विपक्ष को सरकार व सपा पर हमलावर होने का मौका मिले।
सूत्रों का कहना है कि आज जिस तरह से शिवपाल ने आनन-फानन में प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर कौएद के सपा में विलय का एलान किया वह मुख्यमंत्री को रास नहीं आया। मुख्यमंत्री को इस फैसले से चुनाव में पार्टी की किरकिरी होने का भी अंदेशा है। अखिलेश ने बलराम यादव को इसका सूत्रधार मानते हुए उन्हें अपनी टीम से बाहर करने का फैसला किया और देर शाम उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया।