पाकिस्तान में प्रताड़ना से परेशान होकर भारत भाग आए लोगों के संरक्षण के लिए काम करने वाले संगठन बलूचिस्तान हिंदू पंचायत ने नागरिकता संशोधन अधिनियम के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि सीएए तीन देशों के अल्पसंख्यकों के संरक्षण के लिए लाया गया है। यह धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत के विपरीत नहीं है।
संगठन का कहना है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान व बांग्लादेश में मुस्लिम न तो अल्पसंख्यक हैं और न ही उनके साथ धर्म के नाम पर उत्पीड़न होता है।
कोर्ट खचाखच भरा, वकीलों को करनी पड़ी मशक्कत
सीएए और एनपीआर पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान खचाखच भरे कोर्ट रूम की वजह से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद और विकास सिंह सहित अन्य को आगे पहुंचने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इस पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा, ऐसे माहौल में सुनवाई मुश्किल है। बहस के लिए शांति का माहौल होना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिब्बल, राजीव धवन सहित अन्य वकीलों ने भी अटॉर्नी जनरल की बात का समर्थन किया। इस पर चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि वह इसका समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।
गौरतलब है कि सीएए को लेकर इंडियन यूनियन ऑफ मुस्लिम लीग, पीस पार्टी, असम गण परिषद, ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन, जमीयत-उलमा-ए-हिंद, सांसद जयराम रमेश, महुआ मोइत्रा, असददुद्दीन ओवैसी, देव मुखर्जी, तहसीन पूनावाला व केरल सरकार सहित 144 की ओर से याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं।