कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा है कि कांग्रेस का बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने का कोई इरादा नहीं है। एक सप्ताह में मतदान के लिए जा रहे राज्य कर्नाटक के उडुपी में एक बयान देते हुए उन्होंने कहा कि केवल कर्नाटक के स्तर पर बजरंग दल को प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता। इसे बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने के कांग्रेस के घोषणा पत्र के फैसले से पार्टी के यू-टर्न की तरह देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि भाजपा ने जिस तरह बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने के कांग्रेस के निर्णय को भगवान बजरंग बली से जोड़ा, उससे सियासी नुकसान भांपते हुए कांग्रेस ने इससे यू-टर्न ले लिया है। हालांकि, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने मांग की है कि कांग्रेस को अपनी घोषणा पर माफी मांगनी चाहिए और बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की बात को अपने घोषणा पत्र से निकालना चाहिए।
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क्यों लिया यू-टर्न
दरअसल, जब से कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कर्नाटक में सरकार बनने पर प्रतिबंध लगाने की बात कही है, तभी से भाजपा ने इसे भगवान हनुमान पर हमला करार देना शुरू कर दिया। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले को अपनी चुनावी सभाओं में उठा रहे हैं। भाजपा के अलग-अलग नेता अपनी चुनावी सभाओं में इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने में जुट गए हैं। वहीं, बजरंग दल ने इस मुद्दे पर दिल्ली, कर्नाटक, राजस्थान से लेकर मध्यप्रदेश तक प्रदर्शन किया है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया हुई है।
इस मुद्दे पर लोगों की राय देखते हुए कांग्रेस नेताओं का एक धड़ा मानता है कि यदि भाजपा मतदाताओं के बीच इस मामले को धार्मिक रंग देने में सफल रही, तो इससे कांग्रेस का बड़ा नुकसान हो सकता है। यह नुकसान केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका नुकसान मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनावों में भी हो सकता है।
पार्टी के कई नेता मानते हैं कि कर्नाटक राज्य के घोषणा पत्र में बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की बात कहकर अपने ही जाल में फंस गई है। उसे इस तरह का वादा करने से बचना चाहिए था। विशेषकर यह देखते हुए कि किस तरह भाजपा ने राम मंदिर आंदोलन का सहारा लेकर अपनी राजनीतिक यात्रा तय की और बड़ी सफलता हासिल करने में कामयाब रही, बजरंग दल पर प्रतिबंध का वादा उस पर उल्टा पड़ सकता था।
आगे चल रही कांग्रेस
कांग्रेस अब तक कर्नाटक की लड़ाई में आगे मानी जा रही थी। तमाम सर्वे में यह बात खुलकर सामने आ रही थी कि कर्नाटक में जनता बोम्मई सरकार के भ्रष्टाचार से त्रस्त है और एक बदलाव के लिए वह कांग्रेस को सही विकल्प मान रही थी। एक सप्ताह पहले जारी हुए सीएसडीएस के सर्वे में भी यह कहा गया था कि कर्नाटक में 59 फीसदी लोग भाजपा सरकार को भ्रष्टाचार में लिप्त मानते थे, जबकि कांग्रेस के मामले में यह आंकड़ा केवल 35 फीसदी ही था। इस सर्वे में 51 फीसदी लोगों ने यह माना था कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से भ्रष्टाचार में वृद्धि हुई है।
इसी प्रकार बेरोजगारी को 28 फीसदी लोग और गरीबी को 25 फीसदी लोग सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा मानते थे। मतदाताओं का एक बड़ा रुझान उस प्रश्न में दिखाई पड़ा, जिसमें उनसे यह पूछा गया था कि कर्नाटक का विकास कौन पार्टी कर सकती है? कर्नाटक के विकास के लिए 37 फीसदी मतदाताओं ने भाजपा को अपना विकल्प चुना, जबकि अप्रत्याशित रूप से 47 फीसदी लोगों ने कांग्रेस को अपनी प्राथमिकता दी।
विवाद से दूर रहना बेहतर
कर्नाटक चुनाव से जुड़े कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने अमर उजाला से कहा कि कर्नाटक में पार्टी बढ़त बनाए हुए हैं। लगभग हर क्षेत्र में बदलाव की एक आहट दिखाई पड़ रही है। सर्वे में भी यही बात दिखाई पड़ रही है कि राज्य के मतदाता एक बदलाव की ओर आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में कोई संवेदनशील मुद्दा उठाकर भाजपा को अवसर नहीं देना चाहिए।
कर्नाटक चुनाव की तासीर यही
चुनाव विश्लेषक सुनील पांडेय ने अमर उजाला से कहा कि कर्नाटक चुनाव की तासीर यही है कि उसकी शुरुआत विकास, गरीबी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे असली मुद्दों से होती है, लेकिन मतदान आते-आते सभी दल धार्मिक और भावनात्मक मुद्दों पर खेलते हुए दिखने लगते हैं। पिछले दो दशक से ज्यादा समय से कर्नाटक चुनाव में यह बात लगातार देखी जाती रही है।
इस बार भी भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने अंतिम समय में भावनात्मक मुद्दों का दांव खेल दिया है। कांग्रेस ने बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाकर एक वर्ग को खुश करने की कोशिश की है, तो इसे बजरंग बली से जोड़कर भाजपा ने इसका लाभ उठाने की कोशिश की है। इसका सियासी लाभ किसे मिला, यह तो 13 मई को ही पता चलेगा जब चुनाव परिणाम आएंगे।
विहिप ने कहा, घोषणा पत्र से हटाए प्रतिबंध की बात
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेता डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा कि कांग्रेस ने बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की बात कहकर अपनी हिंदू विरोधी मानसिकता का परिचय दिया है। उसकी इतनी राजनीतिक हैसियत नहीं है कि वह बजरंग दल पर पूरे देश में प्रतिबंध लगा सके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के किसी एक नेता के प्रतिबंध लगाने की बात से पीछे हटने से बात नहीं बनेगी। कांग्रेस को बजरंग दल पर प्रतिबंध की बात को अपने घोषणा पत्र से अलग करते हुए नया घोषणा पत्र जारी करना चाहिए।